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सर्वकोश
सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha

महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished496 पृष्ठ

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वर्ती महिमाशाली कवियों को ठीक से समझने के लिए अश्वघोष को ठीक से
समझना आवश्यक है ।
अश्वघोष के महाकाव्यों का एकमात्र संदेश है कि त्याग, तपस्या, जनन-
मरण जन्य दुःख से मुक्ति का अन्वेषण ब्रह्मचर्य रहकर, विषयोपभोग त्यागकर
तपोमय जीवन द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है । क्षुद्र-स्वार्थपूर्ण जीवन का
उद्धार त्याग से होता है । मनुष्य की सच्ची उन्नति संयम-नियम से ही संभव
है । संसार में जन्म लेकर वासना के हाथों का खिलौना बनकर जीना ही मानव
जीवन की सार्थकता नहीं है, प्रत्युत् आत्मोपलब्धि से ही जन्म लेने की सार्थ-
कता सिद्ध होती है, उसी से निःश्रेयस् की प्राप्ति होती है । मानव-जीवन के
इस महत्त्वपूर्ण संदेश के लिए भी संस्कृत महाकाव्यों की परम्परा में महाकवि
अश्वघोष अविस्मरणीय हैं और रहेंगे ।