सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)
Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha
महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा
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१९० सौन्दरनन्दं महाकाव्यम्
ज्ञात्वा, सत्त्वाशयानुशयभावपरीक्षकाय—सत्त्वानाम्=जीवानाम्, आशयाः=अभिप्रायाः,
अनुशयाः=विचाराः, भावाश्च=मनोविकाराश्च, तेषां परीक्षकाः=समीक्षकाः,
तस्मै, तत्त्वविदुषे—तत्त्वस्य=तथ्यस्य, विद्वान्=पण्डितस्तस्मै, बुद्धाय=तथागताय,
कथयाञ्चकार = निवेदयामास ॥ ५१ ॥
हिन्दी—तब नन्द के चंचल मन को जानकर गृहसुख की ओर उन्मुख धैर्यच्युत
प्राणियों के आशय, विचार और मनोविकृति के परीक्षक तथा यथार्थ के जानकार बुद्ध
को निवेदित किया ॥ ५१ ॥
सौन्दरनन्दमहाकाव्य में 'अभिमान-निन्दा'
नामक नवम सर्ग समाप्त ॥ ९ ॥