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सर्वकोश
सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

सौन्दरनन्द महाकाव्य (महाकवि अश्वघोष - विमला संस्कृत एवं हिन्दी व्याख्या सहित सम्पूर्ण १८ सर्ग)

Saundarananda Mahakavya of Ashvaghosha

महाकवि अश्वघोष (व्याख्याकार: आचार्य जगदीशचन्द्र मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished496 पृष्ठ

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पृष्ठ 130

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७६ · सौन्दरनन्दं महाकाव्यम्
पीडितम्, अरविन्दम् = कमलम्, इव = यथा, तत् = सुन्दर्यः, मुखम् = वदनम्, ईक्ष-
माणः = अवलोकयन्, भूयः = पुनः, प्रयानन्दकरः = आनन्दं करोतीति आनन्दकरः,
प्रियायाः आनन्दकरः प्रयानन्दकरः = भार्याप्रीतिकरः, बभूव = अभवत् ॥ २३ ॥
हिन्दी—कारण्‍डव पक्षी से पीड़ित कमल की तरह, कुण्डल से घिस कर मिटे हुए
अङ्गराग के छोर वाले प्रियतमा के मुख को राजा नन्द ने फिर से प्रसन्न कर
दिया ॥ २३ ॥
विमानकल्पे स विमानगर्भे ततस्तथा चैव ननन्द नन्दः ।
तथागतश्चागतभैक्षकालो भैक्षाय तस्य प्रविवेश वेश्म ॥ २४ ॥
अन्वयः—सः नन्दः विमानकल्पे विमानगर्भे तथा चैव ननन्द ततः आगतभैक्षकालः
तथागतः च भैक्षाय तस्य वेश्म प्राविवेश ॥ २४ ॥
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