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सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

सात्वत संहिता (पाञ्चरात्र आगम - भगवान् सङ्कर्षण-नारद संवाद सान्वय सटीक)

Satvata Samhita of Pancharatra Agama with Commentary

भगवान् सङ्कर्षण / महर्षि नारद द्वारा

DevanagariHindipublished837 पृष्ठ

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पृष्ठ 287

२२८ सात्वतसंहिता
परिवाराणां बीजपिण्डयोरनुक्तत्वात् तत्तन्नामाद्याक्षरमेवानुस्वारान्वितं कृत्वा
तत्तत्संज्ञामन्त्रैर्योज्यमित्याह—अभिधानेति सार्धेन । अरान्ताद्येन पूर्वोक्तवर्णचक्रे,
अरान्तो विसर्गः, तदाद्येन अनुस्वारेणेत्यर्थः ॥ १३६ ॥
॥ इति श्रीमौज्यायनकुलतिलकस्य यदुगिरीश्वरचरणकमलार्चकस्य
योगानन्दभट्टाचार्यस्य तनयेन अलशिङ्गभट्टेन विरचिते
सात्वततन्त्रभाष्ये नवमः परिच्छेदः ॥ ९ ॥
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यहाँ परिवारों का बीज पिण्ड नहीं कहा गया है । अतः उनके नाम के आदि
अक्षर को ही अनुस्वार से युक्त कर पूर्वोद्दिष्ट मार्ग से संज्ञा मन्त्रों में जोड़ देना
चाहिये ।
इस प्रकार विभवदेवतान्तर्याग के इस क्रम में सभी देवताओं की पूजा के
लिये यह प्रकाशित किया गया है ॥ १३६ ॥
॥ इस प्रकार डॉ० सुधाकर मालवीय कृत सात्त्वत संहिता के विभवदेवतान्तर्याग
नामक नवम परिच्छेद की हिन्दी समाप्त हुई ॥ ९ ॥
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