सर्वार्थसिद्धि: तत्त्वार्थसूत्र (आचार्य पूज्यपाद - पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री सविस्तार हिन्दी टीका)
Sarvarthasiddhi of Acharya Pujyapada on Tattvartha Sutra with Commentary
आचार्य उमास्वामी / पूज्यपाद (टीकाकार: पं. फूलचन्द्र सिद्धान्तशास्त्री) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंपरिशिष्ट ३
तत्त्वार्थवृत्तिपदे उद्धृतपद्यानुक्रमणी
अट्ठतीसद्दलवा [गो० जी० ५७४] ३९० दंसणमोहक्खवगो [पञ्चसं० १।२०२] ३७९
अट्ठेव सयसहस्सा [गो० जी० ६२८] ३८४ दहकोडाकोडिउ ३८०
अप्पज्जत्ताण पुणो ४१२ दो दो चउ चउ दो दो ४०७
अर्थस्यानेकरूपस्य [अष्टशतीसे उद्धृत] ४०३ पच्छायडे य सिद्धे [सिद्धभ० ४] ४१७
अंतो कोडाकोडी ४१२ पडिगहमुच्चट्ठाणं [वसु० श्रा० २२४] ४११
आकंपिय अणुमाणिय [भ० आ० ५६२] ४१५ पढमप्पढमं णियदं ४०३
आवलिअसंख्यसमया [गो० जी० ५६२] ३९० पंचम आणद पाणद [मूलाचा० १।४९] ४०२
एइंदिय वियलिंदिय ४१२ पुढवी पुढवीकाओ ४०४
एगं पणवीसं पिय ४१२ पुव्वस्स दु परिमाणं ३८०
काऊ काऊ तह [मूलाचार ११३४] ३८७ बत्तीसं अडदालं [गो० जी० ६२७] ३८३
कारणकज्जविहाणं ४०२ बंधं पडि एयत्तं ४०३
खवणाए पट्ठवगो [पञ्चसं० ४।२०३] ३८० भवत्यभावोऽपि च [युक्त्यनु० ६०] ४१५
खीणकसायाण पुणो ३८३ मणपज्जवपरिहारो [पञ्चसं० १।१९४] ३८०
गूढसिरसंधिपव्वं [गो० जी० ३८७] ४१२ मिथ्यादर्शनप्राप्ते ३९०
छस्सुण्ण वेणिण अट्ठ य ३८२ मिस्सेणाणतियं ३८२
जोगा पयडिपदेसा [पञ्चसं० ४।५१३] ४०४ रयणप्पहाए जोयण [मूलाचार १।४२] ४०२
णलया बाहू य तहा [गो० क० २८] ४११ वज्जियघणचउक्कं ३८५
णवणवदि दोण्णि सया ३८२ वर्गः शक्तिसमूहो [सं० पं० सं० १।४५] ३७८
णिच्चिदरधादु सत्तय [वा० अणु० २८] ४०५ विगलिंदिए असीदिं [भावपा० २९] ३९२
तिण्णिसया छत्तीसा [गो० जी० १२३] ३९२ विसवेयणरत्तक्खय [गो० क० ५७] ४०३
तिण्णिसहस्सा सत्तय ३९० वीसनवुंसयवेदा ४१७
तिण्हं दोण्हं दोण्हं [गो० जी० ५३३] ३८८ सव्वीसाणा पढमं [मूलाचार १।४८] ४०२
तिहयं सत्त विहत्तं ४१२ सत्ताई अहुंता [गो० जी० ६३२] ३८४
तेऊ तेऊ तह तेऊ [पञ्चसं० १।१८९] ३८८ सम्मत्ते सत्तदिणा [पञ्चसं० १।२०५] ३९९
तेरसकोडीदेसे [गो० जी० ६४१] ३८४ सोलसगं चउवीसं ३८२
दंडुगे ओरालं [पञ्चसं १।१९९] ३८९