सर्वदर्शनसंग्रह (षोडश दर्शन विमर्श - हिन्दी अनुवाद)
Sarva-Darshana-Sangraha with Hindi Commentary
माधवाचार्य (विद्यारण्य स्वामी) / पं. उमाशंकर शर्मा ऋषि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४ ११४) सर्वदर्शनसंग्रहः । [ रामानुज-
एवञ्च कर्मज्ञानस्य तदनुष्ठानस्य च वैराग्योत्पादनद्वारा चित्त-
कल्मषापनयनद्वारा च ब्रह्मज्ञानं प्रति साधनत्वेन तयोः कार्य्य-
कारणत्वेन पूर्वोत्तरमीमांसयोरेकशास्त्रत्वम् । अतएव वृत्तिका-
रा एकमेवेदं शास्त्रं जैमिनीयेन षोडशलक्षणेनेत्याहुः ॥ ४० ॥
(एवञ्चेति) कर्म ज्ञान ओर उसका अनुष्ठान यह दोना वैराग्य और कल्मषनिरसन
द्वारा ब्रह्मज्ञानके साधन होनेसे कर्मज्ञान ओर ब्रह्मज्ञानके परस्पर कार्यकारणभाव हे
अतः तत्प्रतिपादक पूर्वोत्तर मीमांसा दोनोंका एक शास्त्रत्व हे । अतएव वृत्तिकारनेभी
षोडशलक्षणात्मक जैमानीय शास्त्रके साथ एक शास्त्रत्व वेदान्तको कहा है। यद्यपि
जैमिनिकृत मीमासा द्वादशाध्यायात्मक है तथापि सङ्कर्षण प्रोक्त चतुर्ध्यायात्मक
मिलाकर षोडशाध्याय होते हैं ॥ ४० ॥
कर्मफलस्य क्षयित्वं ब्रह्मज्ञानफलस्य चाक्षयित्वं 'परीक्ष्य लोकान्
कर्मचितान् ब्राह्मणो निर्वेदमायान्नास्त्यकृतः कृतेन' इत्यादि-
श्रुतिभिरनुमानार्थापत्त्युपबृंहिताभिः प्रत्यपादि । एकैकनिन्दया
कर्मविशिष्टस्य ज्ञानस्य मोक्षसाधनत्वं दर्शयति श्रुतिः 'अन्धं
तमः प्रविशन्ति येऽविद्यामुपासते । ततो भूय इव ते तमो य उ
विद्यायां रताः । विद्याञ्चाविद्याञ्च यस्तद्वेदोभयं सह। अविद्यया
मृत्युं तीर्त्वा विद्ययामृतमश्नुते" इत्यादि ॥ ४१ ॥
कर्म फलका क्षयित्व और ब्रह्मज्ञानका अनन्त अक्षय फलत्व श्रुति अनुमान
अर्थापत्त्यादि प्रमाण सिद्ध है 'कृष्यादि कर्मसे सम्पादित सस्यादि फलके समान
यागादि कर्मसे सम्पादित स्वर्गादि फलको भी नाशवान् जानकर त्रैवर्णिक वैराग्य प्राप्त
करे क्योंकि कृत अनित्य कर्मसे अकृत (नित्य) मोक्ष नहीं होता है। अध्रुव
(क्षणिक) कर्मसे ध्रुव (नित्य) मोक्ष नहीं मिलता इत्यादि श्रुति हे। जो कृतक हे
वह अनित्य है इत्यादि अनुमान हे । केवल कर्म और केवल ज्ञानको निन्दित करके
कर्म समुचित ज्ञानको मोक्षसाधनता श्रुति कहती है जो केवल कर्मका अनुष्ठान करते
हैं वे घोर तमोगुण प्रधान प्रकृति (संसार) को प्राप्त होते हैं। एव जो केवल ज्ञाननिष्ठ
हैं वे उसमेभी अधिक तमोगुणको प्राप्त होते हैं। जो कर्म जोग ज्ञानको युगपत
अनुष्ठान करते हैं वे कर्मसे ज्ञानके विरोधी प्राचीन कर्मको विनाश कर्क विद्यासे
(ज्ञान से) ब्रह्मस्वरूपको पाते हैं (कोई २ "अविद्यया मृत्यु तीत्वो" यहापर