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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 6, कुल 267 में से

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पृष्ठ 6

( २ )
---खियाँ जो संतबानी पुस्तक-माला के मूल पाठ था नई
सुधार दी गई हैं और छापे की त्रुटियाँ जो
न कर प्रेस के दबाव से मात्राओं के
पत्र में दिखला दी गई हैं।
हम अपने उन सहायकों को हृदय से धन्यवाद देते हैं जिन्होंने
पद या साखियाँ भेज कर या पदों और साखियों के क्रम से बिठालने और
छापे की त्रुटियों के शोधने में इस काम में सहायता की । संत
सिंह जी ने तरनतारन ज़िला अमृतसर से गुरु नानक साहिब और
ई की साखियाँ भेजीं, पंडित हरिनारायण जी पुरोहित बी० ए० (जयपुर
अकाउन्टन्ट-जेनरल) ने महात्मा सुन्दरदासजी की उत्तम साखियाँ, और
गावबक्ष सिंह (ज़मींदार मौज़ा टँडवा ज़िला फ़ैज़ाबाद) ने पलटू साहिब
नदासजी की बहुत सी साखियाँ और पद भेजे, और लाला गिरधारी
ईस धौलपुर) ने कबीर साहिब की साखियों की तर्तीब और नई
के भेजने में सहायता की। बाबा अचिन्त सरन साधू राधास्वामी मत
ाद) ने मूल पाठ के शोधने और संकेतों का भेद लिखने में असली और
द दी, और बाबू वैष्णवदास बी० ए० (अकौन्टन्ट जेनरल रियासत
और बाबू तेजसिंह बी० ए०, एल० एल० बी० (गत बख़्शी
ह साहिब सी० एस० आई० इन्दौरवाले के पोते) से पदों को क्रम से
रने और प्रूफ़ के शोधने में सहायता मिली। राव बहादुर लाला श्याम-
त्न बी० ए०, सी० आई० ई० (मुरार, ग्वालियर) जो इस परोपकार के
ीवन-चरित्र आदि का मसाला भेजने में मददगार रहे उनकी सहायता
कम नहीं रही । इन सब महाशयों को हम पुनःपुनः धन्यवाद देते हैं ॥
मिला कर २५४० चुनी हुई साखियाँ भाग १ में और ६०३ पद भाग २
। यदि कोई प्रेमी और रसिक जन इस सूचना के पृष्ठ २ वाले
की उत्तम और मनोहर साखियाँ या पद जो संतबानी पुस्तक-माला
थ में नहीं छपे हैं कृपा पूर्वक चुन कर भेज देंगे वह धन्यवाद सहित
में शामिल किये जायेंगे ।

  • लिपियाँ संतबानी की जो सम्पादक ने अनुमान बीस बरस के
    कट्ठा करके यथा शक्ति उन की त्रुटियों को ठीक किया था छप चुकीं
    शिवाय पलटू साहिब की थोड़ी सी मनोहर साखियों और बहुत से उत्तम पदों
    जो उन महात्मा की बानी छापने के पीछे हम को मिले । यह पुराने पदों के
    ाथ तीन भागों में इस क्रम से रक्खे गये हैं कि पहिले भाग में केवल कुंडलियाँ;