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संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

पृष्ठ 143, कुल 267 में से

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पृष्ठ 143

१३४ शब्द संग्रह
॥ प्रेम ॥
(१)
ऐसे साईँ की मैं बलिहरियाँ री ।
ए सखि संग रंग रस मातिउँ, देखि रहिउँ अनुहरियाँ री॥१
गगन भवन माँ मगन भइउँ मैं, बिनु दीपक उजियरियाँ री
झलकि चमकि तहँ रूप बिराजै, मिटी सकल अँधियरियाँ री२
काह कहौँ कहिबे की नाहीं, लागि जाहि मन मँहियाँ री ।
जगजीवन वह जोती निरमल, मोती हीरा वरियाँ१ री ॥३॥
(२)
साईँ तुम सों लागो मन मोर ॥ टेक ॥
मैं तौ भ्रमत फिरौँ निसुबासर,
चितवौ तनिक कृपा करि कोर ॥ १ ॥
नाहिं बिसरावहु नहिं तुम बिसरहु,
अब चित राखहु चरनन ठौर ॥ २ ॥
गुन ऐगुन मन आनहु नाहीं,
मैं तो आदि अंत को तोर ॥ ३ ॥
जगजीवन बिनती करि माँगै,
देहु भक्ति बर जानि कै