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सर्वकोश
संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

संतबानी संग्रह (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - कबीर, दादू, तुलसी, पलटू आदि प्रमुख संतों की वाणी)

Santbani Sangrah: Belvedere Steam Printing Press Allahabad

महामहोपाध्याय पं. सुधाकर द्विवेदी एवं बेलवेडियर प्रेस द्वारा

DevanagariHindipublished267 पृष्ठ

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पृष्ठ 10

कबीर साहिब
[ संक्षिप्त जीवन-चरित्र के लिये देखो पृष्ठ १ भाग १ संतवानी संग्रह ]
॥ गुरुदेव ॥
(१)
चल सतगुरु की हाट, ज्ञान बुधि लाइये ।
कीजे साहिब से हेत, परम पद पाइये ॥१॥
सतगुरु सब कछु दीन्ह, देत कछु ना रह्यो ।
हमहिँ अभागिनि नारि, सुख तजि दुख लह्यो ॥२॥
गई पिया के महल, पिया सँग ना रची ।
हृदै कपट रह्यो छाय, मान लज्जा भरी ॥३॥
जहवाँ गैल सिलहली, चढ़ौँ गिरि गिरि पड़ौँ ।
उठौँ सम्हारि सम्हारि, चरन आगे धरौँ ॥४॥
जो पिय मिलन की चाह, कौन तेरे लाज हो ।
अधर मिलो ना जाय, भला दिन आज हो ॥५॥
भला बना संजोग, प्रेम का चोलना ।
तन मन अरपै सीस, साहिब हँस बोलना ॥६॥
जो गुरु रूठे होयँ, तो तुरत मनाइये ।
हुइये दीन अधीन, चूक बकसाइये ॥७॥
जो गुरु होयँ दयाल, दया दिल हेरिहैं ।
कोटि करम कटि जायँ, पलक छिन फेरिहैं ॥८॥
कहै कबीर समुझाय, समुझ हिरदे धरो ।
जुगन जुगन करो राज, ऐसी दुर्मति परिहरो ॥९॥