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सर्वकोश
सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)

Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra

सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा

DevanagariHindipublished332 पृष्ठ

पृष्ठ 273, कुल 332 में से

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पृष्ठ 273

नामदेव : हिन्दी निर्गुण काव्यधारा के प्रारम्भकर्ता २७६
कोई मार्ग है ही नहीं। 'तुम करोड़ो उपाय क्यों नही करते, राम भजन के बिना भव
सागर को पार करना दुस्तर है।'१
नामदेव बाह्याडम्बर के बहुत विरोधी है। ब्राह्मण वेद पढ़ने का आडम्बर करते
है तो मुसलमान रोजा और नमाज का । नामदेव कहते है कि जब तक मन में भ्रान्ति है
तब तक इन सबका कुछ उपयोग नही।२
ऐसे आडम्बर-प्रेमियों को नामदेव ने पूरी खबर ली है। साधनो ही को महत्त्व
देने वाले भक्तों पर वे व्यंग्य करते है ।३
उपरि-उल्लिखित सब तथ्यो पर विचार करने पर आचार्य विनयमोहन शर्मा का
यह निष्कर्ष समीचीन जान पड़ता है।४
नामदेव तथा कबीर का काल
यद्यपि यह सर्वमान्य तथ्य है कि संत नामदेव कबीर के पहले हुए थे किन्तु यहाँ
में एक बार पुनः इन दोनों के कालों पर विचार कर लेना चाहता हूँ ताकि दोनों का
काल-क्रम स्पष्ट रूप से निश्चित किया जा सके। बड़े खेद की बात है कि कुछ लोगों ने
नामदेव और कबीर को समकालीन भी माना है।
नामदेव का जन्मकाल शके ११९२ (सन १२७० ई०) प्रसिद्ध है।५ महाराष्ट्र
१. राम भगति बिन गति न तिरन की। कोटि उपाइ जु करही रे नर ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद ६२ ।
२. ब्रह्मा पढ़ि गुणि वेद सुनावै । मन की भ्रांति न जावै ॥
करम करै सो सूझै नाही। बहुतक करम कराई ॥
मास दिवस लग रोजा साधै । कलमा बांग पुकारै ।
मनमें काती जीव संघारै । नाव अलह का सारै ॥
—संत नामदेव की हिंदी पदावली, पद ६४ ।
३. मन मैले की सुधि नहिं जाणी । साबन सिला सराह्रै पाणी ॥
४. 'नामदेव में उत्तरी भारत के संत मत की सारी विशेषताएँ विद्यमान हैं। इसीलिए
हम उन्हे उत्तर भारत में निर्गुण भक्ति मत का प्रथम प्रचारक और प्रवर्तक तथा
कबीर आदि संतों का पथ-प्रदर्शक मानते हैं।'
—हिंदी को मराठी संतों की देन, पृष्ठ १२८ ।
५. अधिक ब्याण्णव गणित अकरा शतें । उगवता आदित्य तेजोराशी ।
शुक्ल एकादशी कार्तिकी रविवार । प्रभव संवत् शालिवाहन शके ॥
—सकल संत गाथा, अभंग १२५४ ।