सन्त नामदेव जी की हिन्दी कविता (डॉ. भगीरथ मिश्र - सन्त नामदेव के सम्पूर्ण हिन्दी पद सटीक)
Sant Namdev Ji Ki Hindi Kavita by Dr. Bhagirath Mishra
सन्त नामदेव (सम्पादक: डॉ. भगीरथ मिश्र) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दी निर्गुण काव्यधारा की पृष्ठभूमि
ब्रह्म का अस्तित्व : वैज्ञानिक दृष्टि से—दार्शनिक दृष्टि से
मनुष्य का अहं, उसकी बुद्धि, उसका मन, उसके प्राण और उसका शरीर सब
मिलकर एक सुव्यवस्थित मानव-संगठन का निर्माण करते हैं। ऐसे संगठन इस ब्रह्माण्ड
में अनेक हैं। निखिल ब्रह्माण्ड स्वतः ऐसा ही एक वृहत् संगठन है।
हमारा शरीर जैसे नितांत स्थूल परमाणुओं का संघात है वैसे ही ब्रह्माण्ड के
पृथ्वी आदि लोक भी हैं। शरीर की ही भाँति ब्रह्माण्ड में प्राणशक्ति संचारित हो रही
है। हमारा सूक्ष्म मन ब्रह्माण्ड का सूक्ष्म आकाश है। हमारी बुद्धि ब्रह्माण्ड का द्यौलोक
है। मानव संगठन के समस्त अवयवों का प्रेरक जीवात्मा है। उसी तरह निखिल ब्रह्माण्ड
के अवयवों का प्रेरक एक परम आत्म तत्त्व होना ही चाहिए।
जैसे मानवी शरीर रूपी संगठन को देखकर उसके रचयिता का भान होता है वैसे
ही इस ब्रह्माण्ड के संगठन को देखकर। रचयिता की रचना शक्ति में प्रकाशात्मिका
बुद्धि निहित रहती है उसी बुद्धि का विशाल रूप ब्रह्माण्ड रचयिता के भीतर होना
चाहिए।¹
आधुनिक विज्ञान ने ब्रह्माण्ड के संबंध में जो अनुसंधान प्रस्तुत किये हैं वे उस
परम तत्त्व की विराट् बुद्धि पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं। सृष्टि निर्माण की योजना और
- 'The whole frame work of Nature bespeaks of an intelligent
author.'
'The Idea of God' p. 15
—by Pringle Pattison.
'The idea of a Universal Mind or Logos would be fairly
plausible inference from the present state of scientific
theory, at least it is in harmony with it'
'The Nature of the Physical World' p. 338
—by Eddington.