संस्कार विधि (महर्षि दयानन्द सरस्वती - षोडश वैदिक संस्कार एवं गुरुकुल विधान सटीक)
Sanskar Vidhi of Maharshi Dayananda Saraswati
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा
पृष्ठ 64, कुल 318 में से
संदर्भ में पढ़ें६० संस्कारविधिः
इस मन्त्र से कुण्ड के चारों ओर जल-सेचन करके
आघारावाज्यभागाहुति चार और व्याहृति आहुति चार—दोनों
मिलके आठ आहुति पृष्ठ ३२-३३ में लिखे प्रमाणे करके—
ओम् प्रजापतये त्वा जुष्टं निर्वपामि ॥
अर्थात् चावल, तिल और मूँग इन तीनों को समभाग
लेके—
ओम् प्रजापतये त्वा जुष्टं प्रोक्षामि ॥
अर्थात् धोके इनकी खिचड़ी बना उसमें पुष्कल घी डालके
निम्नलिखित मन्त्रों से आठ आहुति देवें—
ओं धा॒ता द॑दातु दा॒शुषे॒ प्राचींᳵ जी॒वातु॑म॒क्षित॑म् ।
व॒यं दे॒वस्य॑ धीमहि सु॒म॒तिं वा॒जिनी॑वतः॒ स्वाहा॑ ॥
इदं धात्रे—इदन्न मम ॥ १ ॥
ओं धा॒ता प्र॒जाना॑मु॒त रा॒य ई॑शे धा॒तेदं विश्वं॒ भुव॑नं
जजान॑ । धा॒ता कृ॒ष्टीरनि॑मिषा॒भि च॑ष्टे धा॒त्र इद्ध्व्यं
घृ॒तव॑ज्जुहोत॒ स्वाहा॑ ॥ इदं धात्रे—इदन्न मम ॥ २ ॥
ओं रा॒काम॒हं सु॒हवां॑ सुष्टु॒ती हु॑वे शृ॒णोतु॑ नः सु॒भगा॒ बोध॑तु
त्मना॑ । सीव्य॒त्वप॑: सू॒च्याच्छिद्य॑मा॑नया ददा॑तु वी॒रं
श॒तदा॑यमु॒क्थ्यं॒ स्वाहा॑ ॥ इदं राकायै—इदन्न मम ॥ ३ ॥
यास्ते॑ राके सु॒मत॑यः सु॒पेशा॑सो॒ याभि॑र्ददा॑सि दा॒शुषे॑
वसू॑नि । ताभि॑र्नो अ॒द्य सु॒मना॑ उ॒पाग॑हि सहस्रपो॒षं सु॑भगे॒
ररा॑णा॒ स्वाहा॑ ॥ इदं राकायै—इदन्न मम ॥ ४ ॥
—ऋ० मं० २ । सू० ३२ । मं० ४, ५ ॥
नेज॑मेष॒ परा॑ पत सुपु॒त्रः पुन॒रा प॑त ।
अ॒स्यै मे॑ पु॒त्रका॑मायै॒ गर्भ॒मा धे॑हि॒ यः पुमा॒न्त्स्वाहा॑ ॥ ५ ॥