सांख्य दर्शन (सांख्य-प्रवचन सूत्र व हिन्दी व्याख्या सहित)
Sankhya Darshana with Hindi Commentary
महर्षि कपिल द्वारा
स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें( २६ ) हिन्दी सांख्य दर्शन
( क ) कर्मेन्द्रियों का आहार्य ( आहरण करने योग्य ) विषय
१० प्रकार का है (१) दिव्य बचन (बोलना ) ( २ ) अदिव्य
बचन (३) दिव्य आदान ( लेना ) (४) अदिव्य आदान
( ५ ) दिव्य विहार ( चलना ) ( ६ ) अदिव्य विहार
( ७ ) दिव्य उत्सर्ग (छोड़ना) ( ८) अदिव्य उत्सर्ग (६)
दिव्य आनन्द (१०) अदिव्य आनन्द ।
(ख) तीनों अन्तः करणों का धार्य ( धारण करने योग्य )
विषय १० प्रकार का होता है—
(१) दिव्य प्राण ( २ ) अदिव्य प्राण ( ३ ) दिव्य अपान
( ४ ) अदिव्य अपान ( ५ ) दिव्य समान ( ६ ) अदिव्य
समान ( ७ ) दिव्य उदान ( ८ ) अदिव्य उदान (•६ )
दिव्य व्यान ( १० ) अदिव्य व्यान ।
(ग) ज्ञानेन्द्रियों का प्रकाश्य ( प्रकाश करने योग्य ) विषय
१० प्रकार का होता है-
(१) दिव्य शब्द ( २ ) 'अदिव्य शब्द ( ३ ) दिव्य स्पर्श
( ४ ) अदिव्य स्पर्श ( ५ ) दिव्यरूप ( ६ ) अदिव्य रूप
( ७ ) दिव्य रस ( ८ ) अदिव्य रस ( ६ ) दिव्य गन्ध
( १० ) अदिव्य गन्ध ॥ ३२ ॥
तेरह ( १३ ) प्रकार केकरण ।
अन्तःकरणंत्रिविधंदशधाबाह्यंत्रयस्यंविषयाख्यम् ।
साम्प्रतकालंवाह्यंत्रिकालमाभ्यन्तरंकरणम् ॥३३॥
अन्तःकरण तीन प्रकार का होता है बुद्धि, अहंकार,
और मन । बाह्य इन्द्रिय दश प्रकार का होता है-५ ज्ञाने-
न्द्रियें और ५ कर्मेन्द्रियें ।
ये दशों बाह्य इन्द्रियें अन्तःकरण के ही विषय को प्रकट