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समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)

Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary

आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा

DevanagariHindipublished226 पृष्ठ

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पृष्ठ 70

अध्याय - 3
आत्मा उपचार से पुद्गल कर्म का कर्ता कहा है -
जीवम्हि हेतुभूदे बंधस्स दु पस्सिदूण परिणामं।
जीवेण कदं कम्मं भण्णदि उवयारमेत्तेण॥ (3-37-105)
जीव के निमित्तभूत होने पर ज्ञानावरणादि बन्ध का परिणमन देखकर 'जीव ने कर्म
किया' यह उपचार मात्र से कहा जाता है।
The soul is perceived as an extrinsic agent for the modifications
of karmic bondages (knowledge-obscuring karma, etc.) and it is
figuratively said that the karma has been produced by the soul.
व्यवहार से कर्मों का कर्तृत्व -
जोधेहि कदे जुद्धे रायेण कदं त्ति जंपदे लोगो।
तह ववहारेण कदं णाणावरणादि जीवेण॥ (3-38-106)
योद्धाओं के द्वारा युद्ध करने पर 'राजा ने युद्ध किया' इस प्रकार लोग कहते हैं। उसी
प्रकार ज्ञानावरणादि कर्म जीव ने किया, यह व्यवहार से कहा जाता है।
A war is fought by the warriors, still it is figuratively said that
the king is at war. Similarly it is said from the empirical point of
view, that the jīva, or the soul, has produced the karma.
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