समयसार (प्राकृत गाथा एवं हिन्दी-अंग्रेजी व्याख्या)
Samayasara of Acharya Kundakunda with Hindi Commentary
आचार्य कुन्दकुन्द / अमृतचन्द्र सूरि द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअध्याय - 10
ज्ञानादि का घात होने पर पुद्गल का घात नहीं होता -
णाणस्स दंसणस्स य भणिदो घादो तहा चरित्तस्स।
ण वि तम्हि को वि पोग्गलदव्वे घादो दु णिद्दिट्ठो॥
(10-62-369)
ज्ञान, दर्शन और चारित्र का घात बताया है, (किन्तु) उस पुद्गल द्रव्य में कोई घात
नहीं कहा।
Destruction of knowledge, faith, and conduct, has been
mentioned; (but) destruction of physical matter has not been
indicated.
सम्यग्दृष्टि को विषयों में राग नहीं है -
जीवस्स जे गुणा केई णत्थि ते खलु परसु दव्वेसु।
तम्हा सम्मादिट्ठिस्स णत्थि रागो दु विसएसु॥
(10-63-370)
जीव के जो कोई गुण हैं, वे वास्तव में परद्रव्यों में नहीं हैं; इसलिए सम्यग्दृष्टि को
विषयों में राग नहीं है।
The attributes of the soul do not exist in alien substances;
therefore, the right believer has no attachment for the sense-
objects.
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