सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 9, कुल 68 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 9

गुरु आज्ञा ५
॥ चौपाई ॥
सब तीरथ गुरु चरनन लारे। चरन बर्त दृढ़ सदा हमारे॥
चरन कँवल की निसदिन पूजा। परसूँ और देव नहिं दूजा॥
इष्ट हमारे गुरु के चरना। गुरु के चरन ध्यान हूँ करना॥
गुरु के चरन लगे सो तारे। गुरु के चरन प्रान सूँ प्यारे॥
आसा मनसा और करमना। गुरु के चरन प्रेम चित धरना॥
गुरु के चरन होय सो होना। हानि लाभ कै दुख सुख मरना॥
रनजीता¹ गुरु चरन तुम्हारे। जोवन प्रान अधार हमारे॥
गुरु के चरन मुक्ति फलदायक। सहजो गुरुके चरन सहायक ॥१९॥
॥ दोहा ॥
गुरु पग निश्चै परसिये, गुरु पग हिरदे राख।
सहजो गुरुपग ध्यान करि, गुरु बिन और न भाख ॥२०॥
॥ चौपाई ॥
गुरु के चरन कँवल चित राखूँ। आठसिद्धि नौ निधि सब नाखूँ॥
सकल पदारथ गुरु पग माहीं। गुरु पग परसे सब दुख जाहीं॥
गति मति पलटे गुरु पग परसे। गुरु पग परसे त्रिभुवन दरसै॥
गुरु पग परसे ब्रह्म विचारै। गुरु पग परसे माया छाँड़ै॥
गुरु पग परसे जोग जुगन्ता। गुरु पग परसे जीवन मुक्ता॥
गुरु पग परसे बन्धन छूटै। मोह ममत की फाँसी टूटै॥
गुरु पग परसे हरि पद पावै। रहै अमर ह्वै गर्भ न आवै॥
चरनदास पग महिमा भारी। बार बार सहजो बलिहारी ॥२१॥
गुरु आज्ञा
॥ दोहा ॥
गुरु आज्ञा दृढ़ करि गहै, गुरु मत सहजो चाल।
रोम रोम गुरु को रटै, सो सिष होय निहाल ॥२२॥
(१) चरनदास जी का घरऊ नाम ।