सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
DevanagariHindipublished68 पृष्ठ
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५८ सहजो बाई
जैसी तैसी तुम्हहीं चीन्हेव । गुर है ध्यान खेलौना दीन्हेव ॥५॥
तुम्हरी रच्छा ही से जीऊँ । नाम तुम्हारो इमृत पीऊँ ॥६॥
दिष्टि तिहारो ऊपर मेरे । सदा रहूँ मैं सरनै तेरे ॥७॥
मारो झिड़कौ तौ नहिं जाऊँ । सरक सरक तुम्हीं पै आऊँ ॥८॥
चरनदास है सहजो दासी । हो रिच्छक पूरन अविनासी ॥६॥
॥ राग सोरठ ॥
जग में कहा कियौ तुम आय ।
स्वान की ज्यों पेट भरि कै, सोवौ जन्म गँवाय ॥ १ ॥
पहर पिछले नाहिं जागो, कियो ना सुभ कर्म ।
आन मारग जाय लागो, लियो ना गुरु धर्म ॥ २ ॥
जप न कीयो तप न साधो, दियो ना तैं दान ।
बहुत उरझो मोह मद में, आपु काया मान ॥ ३ ॥
देह घर है मौत का रे, आन काढै तोहि ।
एक छिन नहिं रहन पावै, जब कैसे कुछ होय ॥ ४ ॥