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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

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पृष्ठ 61

मिश्रित ५७
भौसागर में डर लागत मोहिं, तारौ बेगहि पार उतारी।
चरनदास गुरु किरपा सेती, सहजो पाई सरन तिहारी ॥४॥
॥ राग ईमान ॥
ज्यों त्यों राम नाम ही तारै।
जान अनजान अग्नि जो छूबै, वह जारै पै जारै ॥ १ ॥
उलटा सुलटा बीज गिरै ज्यौं, धरती माहीं कैसे।
उपजि रहै निहचै करि जानौ, हरि सुमिरन है ऐसे ॥ २ ॥
बेद पुरानन में मथि काढ़ा, राम नाम तत सारा।
तीन कांड¹ में अधिकौ जानौ, पाप जलावनहारा ॥ ३ ॥
हिरदा सुद्ध करै बुधि निरमल, ऊँची पदवी देवै।
चरनदास कहैं सहजो बाई, ब्याधा सब हरि लेवै ॥ ४ ॥
॥ राग रामकली ॥
अब तुम अपनी ओर निहारो।
हमरे औगुन पै नहिं जाओ, तुम्हहीं अपना बिरद सम्हारो॥१॥
जुग जुग साख तुम्हारी ऐसी, वेद पुरानन गाई।
पतित-