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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

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पृष्ठ 59

मिश्रित ५५
खोट कपट पंछी उड़ाव । मोह प्यास सबही जलाव ॥
सँभलै बाड़ी नऊ अंग । प्रेम फूल फूलै रँग रंग ॥
पुहुप गँध माला बनाव । आदि पुरुष कूँ जा चढ़ाव ॥
तौ सहजो बाई चरनदास । तेरे मन की पुरवै सकल आस ॥
( ३ )
मिलि गावो रे साधो यह बसंत । जाकी अविगत लीला अगम पंथ ॥
जहँ नाँव पदारथ है इकङ्ग । नहिं पैये दूजा और अंग ॥
जहँ दरसै साधो एक एक । नहिं पैये दूजा कोई भेष ॥
जहँ ज्ञान ध्यान को लगो तार । जहँ आप बिराजै ओंकार ॥
देखो सब घट ब्यापक निराकार । कोई न पावै वह बिचार ॥
जहँ ब्रह्म अखंडित अति अनूप । जाको सुरमुनि जोगी ध्यावै भूप ॥
जहँ छाय रहो है सर्ब माहिं । कोई नहिं संतो खाली ठाहिं ॥
गुरु चरनदास पूरन औतार । जिन दान दियो जग ब्याध टार ॥
सहजो