सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें४६ सहजो बाई
वा ही सेती लाग, करी जिन यह गुलजारी।
पात पात की खबर, डाल सब लागै प्यारी॥
आपन हो कूँ जानि लै, वाही ठौर का फूल।
चरनदास कहै सहजिया, ऐसे समझो कूल॥
(२)
बुध बारी में फल घने, जो पै देवै बाड़।
रखवारी के बिन किये, पाँचौ करै उजाड़॥
पाँचौ करै उजाड़, पचीसौ चरि चरि जाई।
सावधान जो होय, सोई वा के फल खाई॥
चरनदास कहै सहजिया, ऐसे समुझ बिचार।
तेरी काया में खिले, भाँति भाँति गुलजार॥
(३)
बृहस्पति वारी आइया, पाई मनुषा देह।
सो तन छिन छिन घटत है, भयौ जात है खेह॥
भयौ जात है खेह, बहुरि लाहा कब लैहौ।
बेगहिं समुझ सँभार, नहीं बहुतै पछितैहौ॥
आगा पीछा क्या करै, सकल बासना त्याग।
चरनदास कहै सहजिया, हरि सुमिरन कूँ लाग॥
(४)
सुक्कर सर१ उपदेस का, लगा कलेजे नाहिं।
ते नर पसू समान हैं, या दुनियाँ के माहिं॥
या दुनियाँ के माहिं, सदा चक्कर में डोलैं।
आवा गौन दुख महा, तासु की गाँठि न खोलैं॥
ऐसे मूरख बावरे, भोंदू मुग्ध२ गँवार॥
चरनदास कहै सहजिया, भरमैं बारम्बार॥
(१) बान, तीर। (२) मूर्ख।