सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसात वार निर्णय ४५
॥ चौदस ॥
चौरासी भुगती घनी बहुत सही जम मार ।
भरम फिरे तिहुँ लोक में तहू न मानी हार ॥
तहू न मानी हार मुक्ति की चाह न कीन्ही ।
हीरो देही पाय मोल माटी के दीन्ही ॥
मूरख नर समझै नहीं समझाया बहु बार ।
चरनदास कहैं सहजिया सुमिरै ना करतार ॥
॥ पूनो ॥
पूनो पूरा गुरु मिलै मेटै सब सन्देह ।
सोवत सूँ चेतन्न होय देखै जाग्रत गेह ॥
देखै जाग्रत गेह जहाँ सूँ सपने आयौ ।
जग कूँ जान्यौ साँच रूप अपनो बिसरायौ ॥
चरनदास कहैं सहजिया गुरु चरनन चित लाव ।
तिमिर मिटै अज्ञान कूँ ज्ञान चाँदनो पाव ॥
॥ दोहा ॥
सोलह तिथि पूरन भई, सहजो करो बखान ।
चरनदास की दया सूँ, मिटौ सकल अज्ञान ॥
लिखै पढ़ै सुनै प्रीत सूँ, ता को पाप नसाहि ।
और ऐसी करनी करै, मुक्ति रूप ह्वै जाहि ॥
॥ सात वार निर्णय ।'
॥ दोहा ॥
नमो नमो सुकदेव जी, तुम्हरी सरन गही ।
मेरे सिर पर हाथ धरि, चरनों लागि रही ॥
सात वार बरनन करूँ, कुँडली माहिं उचार ।
याही सुख सूँ कहत हूँ, तुम कूँ हिरदे धारि ॥
॥ कुण्डलिया ॥
( १ )
मंगल मालो राम है, जाका यह जग बाग ।
निस दिन ताही में रहै, वा ही सेती लाग ॥