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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

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पृष्ठ 5

सहजो बाई का सहज प्रकाश
सतगुरु महिमा का अंग
॥ दोहा ॥
कर जोरूँ परनाम करि, धरूँ चरन पर सीस ।
दादा गुरु सुकदेव जी, पूरन बिस्वा बीस ॥ १ ॥
परमहंस तारन तरन, गुरु देवन गुरु देव ।
अनुभै बानो दीजिये, सहजो पावै भेव ॥ २ ॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो गुरु देवन देवा । नमो नमो गुरु अगम अभेवा ॥
नमो नमो निरलम्ब निरासा । नमो नमो परमातम बासा ॥
नमो नमो त्रिभुवन के स्वामी । नमो नमो गुरु अंतरजामी ॥
नमो नमो गुरु पातक हरता । नमो नमो परायन करता ॥
गति मति छाके आनँद रूपा । नमो नमो गुरु ब्रह्म सरूपा ॥
नमो नमो मम प्रान पियारे । नमो नमो तिर्गुन तें न्यारे ॥
भक्ती ज्ञान जोग के राजा । सहजो के पुरवो सब काजा ॥
जो कोइ सरन तुम्हारी आयौ । तुरियातीत बिज्ञान बसायौ ॥ ३ ॥
॥ दोहा ॥
निर्मल आनँद देत हौ, ब्रह्म रूप करि देत ।
जीव रूप की आपदा, ब्याधा सब हरि लेत ॥ ४ ॥
॥ चौपाई ॥
नमो नमो सुकदेव गुसाईं । प्रकट करी भक्ती जग माहीं ॥
श्रीमतभागवत् भानु प्रकासा । पढ़ सुनि कटै तिमिर को फाँसा ॥
ज्ञान जोग की नौका कीन्ही । चरनदास केवट को दीन्ही ॥
बहुतक पापी जीव चढ़ाये । भवसागर सूँ पार लँघाये ॥