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सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

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पृष्ठ 4

सहजो बाई का जीवन-चरित्र
सहजो बाई राजपूताना के एक प्रतिष्ठित धूसर कुल की स्त्री थीं जो परम भक्त हुईं और संत
मत के अनुसार साध गति को प्राप्त हुईं। इनका जीवन-चरित हमने भक्त-माल और उस प्रकार
की कई पुस्तकों में ढूँढ़ा परन्तु कहीं कुछ प्रमाणिक वृत्तान्त न पाया। उनकी बानी से इतना निश्चय
होता है कि वह सम्वत् १८०० में बर्तमान थीं और प्रसिद्ध महात्मा चरनदास जी की गुरुमुख चेली
थीं जो आप भी मेवात के एक धूसर कुल में प्रकट हुए थे और जिनके अनुयायी भारतवर्ष के देश-
देशान्तर में अब तक हजारों हैं, यद्यपि उनमें शब्द अभ्यासी और भेदी बिरले देख पड़ते हैं। सहजो
बाई की बानी से चरनदासजी के जन्म का समय भादों सुदी ३ मंगलवार संवत् १७६० बिक्रमी
प्रमान होता है।
सहजो बाई के विषय में कोई कोई चमत्कार के कौतुक प्रसिद्ध हैं परन्तु चूँकि उनका कहीं
प्रमान नहीं मिलता यहाँ लिखना उचित नहीं है। उनकी गहरी गुरुभक्ति और गति उनकी अति
कोमल, मधुर और हृदयवेधक बानी से जानी जा सकती है।
दयाबाई (जिनकी कोमल और मधुर बानी अलग छपी है) सहजो बाई की सजाती और
गुर-बहिन थीं।
अधम, एडिटर संतबानी पुस्तकमाला।
॥ सूचीपत्र ॥
सतगुरु महिमा का अंग १-३ | जन्म दशा २१-२४
हरि तें गुरु की विशेषता ३-४ | वृद्ध अवस्था २४-२६
गुरु मारग महिमा ४ | मृत्यु दशा २६-२७
गुरु चरन महिमा ४-५ | काल मृत्यु २७
गुरु आज्ञा ५-६ | अकाल मृत्यु २८-२६
गुरु-विमुख ६-७ | नाम का अंग २६-३२
गुरु शब्द ७ | नन्हा महा उत्तम का अंग ३२-३४
उपदेश गुरु भक्ति का ८ | प्रेम का अंग ३४-३५
गुरु महिमा ८-११ | अजपा गायत्री का अंग ३५
साधु महिमा ११-१३ | संत बैराग जगत मिथ्या का अंग ३५-३६
दुष्ट लक्षण १३ | सच्चिदानन्द का अंग ३६-३७
साधु लक्षण १३-१५ | नित्य अनित्य सांख्य मत का अंग ७-३८
द्वादस प्रकार के बचन साध के १५ | निर्गुन सर्गुन संशय निवारन भक्ति का अंग ३८-४१
द्वादस प्रकार के बचन दुष्ट के १६ | सोलह तिथि निर्णय ४१-४५
बैराग उपजावन का अंग १६-२० | सात बार निर्णय ४५-४७
कर्म अनुसार योनि २०-२१ | मिश्रित पद ४८-६२