सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसोलह तिथि निर्णय ४१
दिल्ली सहर सुहावना, प्रोक्षितपुर में बास।
तहाँ समापत ही भई, नवका सहज प्रकास॥
सहज प्रकास पोथी कही, चरनदास परताप।
पढ़ै सुनै जो प्रीत सूं, भाजै सबही पाप॥
सोलह तिथि निर्णय
परनाम करूँ सुकदेव जी, तुम पर वारूँ प्रान।
सोलह तिथि अब कहत हूँ, इनका दीजै ज्ञान॥
चरनदास के चरन कूँ, निस दिन राखूँ ध्यान।
ज्ञान भक्ति और जोग कूँ, तिथि में करूँ बखान॥
॥ कुण्डलियाॅं ॥
मावस
ममा ररा दो अंक कूँ राखौ हिरदे माहिं।
धर्मराय जाँचे नहीं लेखा माँगे नाहिं॥
लेखा माँगे नाहिं जाय नहिं जमपुर बंधा।
ऐसे निर्मल नाम को बिसरै सो अंधा॥
टीका चारो बेद का महिमा कही न जाय।
औसर बीतौ जात है सहजो सुमिर अघाय॥
॥ पड़िवा ॥
पानी का सा बुलबुला यह तन ऐसा होय।
पीव मिलन की ठानिये रहिये ना पड़ि सोय॥
रहिये ना पड़ि सोय बहुर नहिं मनुखा देही।
आपन ही कूँ खोज मिलै जब राम सनेही॥
हरि कूँ भूले जो फिरैं सहजो जीवन छार।
सुखिया जब ही होयगो सुमिरैगो करतार॥
॥ दूज ॥
दोयज धंधा जगत का लागि रहै दिन रैन।
कुटुँब महा दुख देत है कैसे पावै चैन॥