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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 68 में से

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पृष्ठ 42

" ?
It is: त with u-matra: "तु" !
Then "चा"!
IT IS "तुचा", NOT "त्वचा"!
Look closely at line 5:
"नासा तुचा न पाय ॥ ४ ॥"
Yes! It is clearly "तुचा" (त + ु + चा)!

Line :
"अनुभव ही सूँ जानिये, चित्त बुधि थकि थकि जाहिं ।"
Wait, is it "सूँ" with chandrabindu?
Yes, "सूँ"!
"चित बुधि" or "चित्त बुधि"?
Look at:
च with short-i: चि
Then: त (single त, not double त्त)!
Wait, look at "तत्त" in line 3: "तत्त" has the double-t horizontal line.
In line 6: "चित" has just a single त!
So it is "चित बुधि"!
"थकि थकि जाहिं ।" (notice dot on जाहिं).

Line :
"तीन भाँति हंकार की, सो भी पावै नाहिं ॥ ५ ॥"
Wait, "भाँति" has chandrabindu.
"हंकार" has anusvara (or chandrabindu? Just dot: हंकार).
"की," (comma).
"सो भी पावै नाहिं ॥ ५ ॥"

Line :
"जाके रस नहिं रूप नहि