सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)
Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press
साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंसाध लक्षण १३
साध बृच्छ बानी कली, चर्चा फूले फूल ।
सहजो संगत बाग में, नाना फल रहे झूल ॥१५॥
सहजो दरसन साध का, दो नैनों भरि लेहि ।
तिहूँ ताप नसि जायँगे, सीतल होगो देहि ॥१६॥
सहजो दरसन साध का, देखूँ वारूँ प्रान ।
जिन की किरपा पाइये, निर्भय पद निर्बान ॥१७॥
दुष्ट लक्षण
॥ दोहा ॥
दुष्टन की महिमा कहूँ, सुनियो संत सुजान ।
ताना दै दै दृढ़ करें, भक्ती जोग अरु ज्ञान ॥१८॥
॥ चौपाई ॥
धन दुष्टी जो दृढ़ता देई । निन्दा कर पातक हरि लेई ॥
दुष्टी त्यागी दीखै भारी । समझ सोच सहजो बलिहारी ॥
तज दइ साध संग गुरु चरना । त्यागी भक्ति ध्यान का धरना ॥
त्यागी उत्तम रहनी गहनी । त्यागी हरि की लीला कहनो ॥
त्यागे बचन बिमल सुखदाई । तजि दियो साँच झूठ लौ लाई ॥
जत सत सील छिमा तजि दीन्हा । सो साधू माथे धरि लीन्हा ॥
तजी दीनता सुबुधि चिताई१ । सो गरीब साधों ने पाई ॥
तजि बैराग परम संतोषा । सब बिधि तज्यो राम गति मोषा ॥१९॥
॥ दोहा ॥
भली चाल दुष्टी तजै, ऐसा त्यागा होय ।
बुरी चाल साधू तजै, तजन कहै सब कोय ॥२०॥
साध लक्षण
॥ चौपाई ॥
साध सोई जो काया साधै । तजि आलस और बाद बिबादै ॥
गहै धारना सब गति भारी । तजै बिकलता अस्तुति गारी ॥
छिमावन्त धीरज कूँ धारै । पाँचो बस करि मन कूँ मारै ॥
(१) सावधानता ।