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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 16, कुल 68 में से

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पृष्ठ 16

ही करते घात ॥१३॥`

  • Wait, "जम ही करते घात" - is it 'जम'?
  • Yes, 'जम' (यमरूप / यमराज).
  • Sakhi 14:
    • सहजो संगत साध की, छूटै सकल बियाध ।
      • "सहजो संगत साध की, छूटै सकल बियाध ।"
      • Wait, there is a comma after की: की,.
    • दुर्मति पाप रहै नहीं, लागै रंग अगाध ॥१४॥
      • "दुर्मति पाप रहै नहीं, लागै रंग अगाध ॥१४॥"
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    Header line:
    १२ सहजो बाई

    Verse lines:
    साध मिले पूरी भई, जनम जनम की आस ।
    सहजो पायौ भाव तें, सतसंगत में बास ॥ २ ॥
    सहजो साधन के मिले, मन भयो हरि के रूप ।
    चाह गई थिरता भई, रंक लख्यौ सोइ भूप ॥ ३ ॥
    साध मिले हरि ही मिले, मेरे मन परतीत ।