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सर्वकोश
सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

सहजोबाई की बानी: सहज प्रकाश (बेलवेडियर प्रेस, इलाहाबाद - सन्त चरनदास शिष्या)

Sahjobai Ki Bani: Sahaj Prakash: Belvedere Press

साध्वी सहजोबाई (सम्पादक: बेलवेडियर प्रेस) द्वारा

DevanagariHindipublished68 पृष्ठ

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पृष्ठ 11

गुरु शब्द ७
साध कहावै आप कूँ, चलै दुष्ट की चाल ।
बाद लिये फूला फिरै, बहुत बजावै गाल ॥२७॥
॥ चौपाई ॥
बेमुख बिषई ज्ञान उचारै । पाँचो जीत न मन कूँ मारै ॥
दारा सुत कूँ हरि गुरु जाने । तन मन विषय बास लिपटाने ॥
पाप पुन्य कूँ झूठ बतावै । परनारी परधन चित लावै ॥
महा अजोगी जोग न ठानै । छल बल झूठ कपट सिध मानै ॥
साध संत कूँ ठगिया जानै । राम भक्ति कूँ तुच्छ बखानै ॥
ऐसे अपराधी मति मारे । तृस्ना काम क्रोध के जारे ॥
डूबे लोभ लहर के माहीं । सुपने छिमा सील चित नाहीं ॥
हिंसा अंकुस लिये दुखदाई । मुख देखै नहिं सहजो बाई ॥२८॥
गुरु शब्द
॥ दोहा ॥
गुरू बचन हियरे धरै, ज्यों किर्पिन के दाम ।
भुमि गड़े माथे दिये, सहजो लहै तो राम ॥२६॥
॥ चौपाई ॥
गुरु के सब्द हिये बिच धारै । गुरुमुख गुर के सब्द सम्हारै ॥
तीन लोक जम जोरा लूटै । गुरु के सब्द बिना नहिं छूटै ॥
मोह नींद में सब नर पागे । गुरु के सब्द बिना नहिं जागे ॥
गुरु के सब्द स्रवन जो जावै । छूटै कुबुधि परम गति पावै ॥
गुरु के सब्द प्रेम उजलावैं । गुरु के सब्द हरि आन मिलावै ॥
गुरु के सब्द जीव बुधि नासैं । गुरु के सब्द अभय पद भासैं ॥
गुरु के सब्द राह सोइ चलना । बेद पुरान कहा लै करना ॥
चरनदास गुरु सब्द तुम्हारे । हमरे भर्म फन्द सब जारे ॥
गुन सब गुरु के बचनै माहीं । सहजो सिष जो बिसरै नाहीं ॥३०॥