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सर्वकोश
रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)

Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary

भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा

स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished68 पृष्ठ

पृष्ठ 60, कुल 68 में से

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पृष्ठ 60

५८ रुद्रयामलतन्त्रम्
बह्वाहारकथनम् ।
बिभीतपत्रमंत्रेण दक्षजंघेन पीडयेत् ।।
तदा विंशज्जनस्यैव ह्याहारं कुरुते नरः ।। १ ।।
बहेरेका पत्ता दहिनी जंघासे पीसे अरकु लगावे तो बीस जनोंका आहार
भक्षण करे। मंत्रसे पत्तेका पीडन करे ।। १ ।।
बिभीतपत्रं दंतं च श्वेतश्वानस्य निश्चितम् ।।
कटौ बंधनमात्रेण बहुभुग्जायते नरः ।। २ ।।
बहेरेका पत्ता तथा सफेद कुत्तेका दांत कमरमे बाँधे और मंत्रका जप
कर सिद्ध करे तो बहुत भक्षण करे ।। २ ।।
संध्यायां च समादाय ह्यमलतालस्य पुष्पकम् ।।
मालां निर्माय यत्नेन कंठे कृत्वासुभोजयेत् ।। ३ ।।
कौपीनमोचनं कृत्वा तदा च बहुभोजयेत् ।। ४ ।।
मंत्रः ॐ नमः भूतादिपतये ग्रस ग्रस शोषय
शोषय भैरवी आज्ञापयती स्वाहा ।
वमनं कृत्वा तु तं गृह्य शिखायां च निवेशयेत् ।।
तदा बहु करोत्येव भोजनं नात्र संशयः ।। ५ ।।
संध्याके समय मंत्रसे किरअरी जिसमे अमिलतास होती है तिसके
फूलकी माला बनाके यत्नसे कंठमे बाँधे और कौंपीन छोडकर बहुत भोजन
करे । मंत्र मूलमें लिखा है वह पढे अथवा वमन कर मंत्र से वही माला शिखामे
बाँधे तो बहुत भोजन करे ।। ३ ।। ४ ।। ।। ५ ।।