रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंहिन्दीटीकासहितम् ५७
जो विष खाके या और कोई कालसे मरा होय तो नास दियेसे क्षणमात्रमें
महादेवके प्रसादसे जीवे ॥ ५९ ॥
पारदं मानुषं वीर्यं समभागं समानयेत् ॥
तैले समर्थं यत्नेन मृतस्य नस्यमाददेत् ॥ ६० ॥
कालतो गतजीवस्य देहे जीवो प्रविश्यति ॥
महादेवेन कथितं मिथ्या नैव भविष्यति ॥ ६१ ॥
तथा तेलमें पारा या मनुष्यका वीर्य बराबर २ मिलाके नास दे तो मरे
हुये मनुष्यको चेत करे यह महादेवका वाक्य है मिथ्या नहीं हो सकता
है ॥ ६० ॥ ६१ ॥
पुष्यार्के गुरमैमूलं तप्ततोयेन मर्दयेत् ॥
धेलप्रमाणपीतेन मृत्युं न स्यादकालतः ॥ ६२ ॥
मंत्रः । ॐ अघोरेभ्यो घोरघोरतरेभ्यः स्वाहा ।
सर्वतः . सर्वसर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपाय ॥
इति श्रीअवस्थिप्रयागदत्तसुतरामचरणविरचिते
रुद्रयामले भाषावार्तिकासंस्कृते अमृता-
दिकथनं नाम तृतीयःपटलः ॥ ३ ॥
पुष्यार्कमें गुरमाकी मूल तप्त जलमें मर्दन कर एक धेलाभर (८ मासे)
नित्य प्रति पीवे तो अकालसे मृत्यु नहीं होवे और यह मंत्र जपे तो सिद्धि होय
॥ ६२ ॥
इति हिन्दीटीकायां तृतीयः पटलः ॥ ३ ॥