रुद्रयामल तन्त्र (उत्तर तन्त्र - हिन्दी व्याख्या सहित)
Rudrayamala Tantra (Uttara Tantra) with Hindi Commentary
भगवान भैरव / पं. रामचरण शर्मा द्वारा
स्रोत: खेमराज श्रीकृष्णदास · खेमराज श्रीकृष्णदास · 1950 (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ें३० रुद्रयामलतन्त्रम्
सिंह वीर वायु नरसिंहवीर प्रचंडकी शक्ति
लें लें लें लें त्रिशूला उत् मूला गर्जि झाइ
छडाउ ताहि छाडि । मंत्रः । ॐ नमो नर-
सिंहाय कपिलजटाय अमोघवीचासत्तवृ-
त्ताय महाडोग्रचंडरूपाय ॐ र्ह्रीं र्ह्रीं छां
छां छीं छीं फट् स्वाहा ॥ जपेद्दशसहस्त्रं तु
हवनं तद्दशांशतः ॥ रक्तपुष्पैः कोविदारैरा-
ज्येन च समन्वितैः ॥ २८ ॥
इन मंत्रोंका दश हजार जप और दशांश लाल कदपल और घृत फूल
मिलाकर होम करे ॥२८॥
काकपक्षं तथा पादं कुशं चांजलिनाग्रहीत् ॥
चैकविशत्यंजलि च दद्यान्नद्यां निरंतरम् ॥ २९ ॥
कौवेका पंख तथा पंजा और कुश हाथमें लेकर इक्कीस अंगली नदीमें
निरंतर तर्पण करे ॥२९॥
नित्यं गत्वा जपेन्मंत्रमष्टोत्तरशतं तथा ॥
अर्कपुष्पान्करे कृत्वा भ्रमचित्तो भविष्यति ॥ ३० ॥
मंत्रः । ॐ नमोटकिप्रमोटगोरोअमुकस्यामु-
कस्य अरुव कुरु कुरु स्वाहा ॥
एक सौ आठ वार मंत्र जपे, अकउडके फूल हाथमें लेकर मंत्र जपे तो
शत्रु भ्रमचित्त हो जाय ॥३०॥