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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 482, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 482

त्वष्टा देव हमारे सामने आवें और यज्ञ के कारण स्तोता और ऋत्विजों के प्रति प्रसन्न हों.
वृत्रनाशक, यजमानों की इच्छा पूर्ण करने वाले एवं महान् इंद्र हमारे इस यज्ञ में आवें. (६)
उत न ईं मतयोऽश्वयोगाः शिशुं न गावस्तरुणं रिहन्ति.
तमीं गिरो जनयो न पत्नीः सुरभिष्टमं नरां नसन्त.. (७)
जिस प्रकार गाएं बछड़ों को चाटती हैं, उसी प्रकार घोड़ों के समान वेगशाली हमारी
बुद्धियां नित्ययुवा इंद्र को घेरती हैं. स्त्रियां जिस प्रकार पति को पाकर संतान उत्पन्न करती हैं,
उसी प्रकार हमारी स्तुतियां इंद्र के पास पहुंचकर फलों को जन्म दें. (७)
उत न ईं मरुतो वृद्धसेनाः स्मद्रोदसी समनसः सदन्तु.
पृषदश्वासोऽवनयो न रथा रिशादसो मित्रयुजो न देवाः.. (८)
परम शक्तिशाली, हमारे समान ही प्रीतियुक्त, पृषत नामक घोड़ों वाले, नम्र एवं
शत्रुनाशक मरुद्गण धरती और आकाश से हमारे पास इस प्रकार आवें, जिस प्रकार मित्रता
करने वाले एक-दूसरे के समीप जाते हैं. (८)
प्र नु यदेषां महिना चिकित्रे प्र युञ्जते प्रयुजस्ते सुवृक्ति.
अध यदेषां सुदिने न शरुर्विश्वम्प्रैरिणं पृषायन्त सेनाः.. (९)
मरुद्गण स्तुति का प्रयोग जानते हैं, इसलिए उनकी महिमा से सभी परिचित हैं. जिस
प्रकार सुदिन में आकाश में प्रकाश फैल जाता है, उसी प्रकार मरुतों की वर्षा करने वाली
सेना सारी ऊसर धरती को उपजाऊ बना देती है. (९)
प्रो अश्विनाववसे कृणुध्वं प्र पूषणं स्वतवसो हि सन्ति.
अद्वेषो विष्णुर्वात ऋभुक्षा अच्छा सुम्नाय ववृतीय देवान्.. (१०)
हे ऋत्विजो! हमारी रक्षा के लिए अश्विनीकुमारों एवं पूषा के अतिरिक्त स्वाधीन शक्ति
वाले तथा द्वेषरहित विष्णु, वायु और इंद्र की भी स्तुति करो. मैं सुख प्राप्ति के लिए सब देवों
के सामने स्तुति करूंगा. (१०)
इयं सा वो अस्मे दीधितिर्यजत्रा अपिप्राणी च सदनी च भूयाः.
नि या देवेषु यतते वसूयुर्विद्यामेषं वृजनं जीरदानुभ्.. (११)
हे यज्ञयोग्य देवो! तुम्हारी प्रसिद्ध ज्योति हमें प्राण और शरण देने वाली बने. तुम्हारी
हव्य अन्न सहित स्तुति देवों को प्राप्त हो, जिससे हम अन्न, बल और दीर्घ आयु प्राप्त करें.
(११)
सूक्त—१८७ देवता—पितृ
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