सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 356, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 356

युवं नरा स्तुवते पज्रियाय कक्षीवते अरदतं पुरन्धिम्.
कारोतराच्छफादश्वस्य वृष्णः शतं कुंभाँ असिञ्चतं सुरायाः.. (७)
हे नेताओ! तुमने स्तुति करने वाले अंगिरागोत्रीय कक्षीवान् को पर्याप्त बुद्धि दी थी.
जिस प्रकार शराब बनाने वाले कारोतर नामक पात्र से सुरा का आसवन करते हैं, उसी प्रकार
तुमने अपने सवन-समर्थ अश्व के खुर से सौ घड़े शराब निकाली. (७)
हिमेनाग्निं घ्रंसमवारयेथां पितुमतीमूर्जमस्मा अधत्तं.
ऋबीसे अत्रिमश्विनावनीतमून्निन्थ्युः सर्वगणं स्वस्ति.. (८)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने ठंडे जल से उस अग्नि को बुझाया था, जो असुरों द्वारा उन्हें
पीड़ा पहुंचाने के लिए जलाई गई थी. तुमने उन्हें अन्नसहित बलप्रद क्षीर दिया था. अत्रि
यंत्रपीड़ार्गह में नीचे को मुंह करके लटकाए गए थे, तुमने उन्हें उनके साथियों सहित छुड़ाया.
(८)
परावतं नासत्यानुदेथामुच्चाबुधं चक्रथुर्जिह्मबारम्.
क्षरन्नापो न पायनाय राये सहस्राय तृष्यते गोतमस्य.. (९)
हे अश्विनीकुमारो! तुम गौतम ऋषि के समीप कुएं को ले गए थे. उसका मूल ऊपर एवं
द्वार नीचे कर दिया था. उस में से हव्य देने वाले एवं सहनशील गौतम के पीने के निमित्त जल
निकलने लगा था. (९)
जुजुरुषो नासत्योत वव्रिं प्रामुञ्चतं द्रापिमिव च्यवानात्.
प्रातिरतं जहितस्यायुर्देसादित्पतिमकृणुतं कनीनाम्.. (१०)
हे अश्विनीकुमारो! तुमने जीर्ण च्यवन ऋषि को व्याप्त करने वाले बुढ़ापे को कवच के
समान दूर कर दिया था. हे दर्शनीयो! तुमने पुत्रों द्वारा परित्यक्त च्यवन का जीवन बढ़ाया एवं
उन्हें कन्याओं का पति बनाया. (१०)
तद्वां नरा शंस्यं राध्यं चाभिष्टिमन्नासत्या वरूथम्.
यदिद्धांसा निधिमिवापगूळ्हमुद्दर्शतादूपथुर्वन्दनाय.. (११)
हे नेता रूप अश्विनीकुमारो! तुमने गुप्त धन के समान कुएं में छिपे वंदन ऋषि को
जानकर वहां से निकाला. तुम्हारा यह कर्म चाहने योग्य, वरणीय एवं प्रशंसनीय है. (११)
तद्वां नरा सनये दंस उग्रमाविष्कृणोमि तन्यतुर्न वृष्टिम्.
दध्यङ् ह यन्मध्वाथर्वणो वामश्वस्य शीर्ष्णा प्र यदीमुवाच.. (१२)
हे नेताओ! अथर्वा के पुत्र दध्यंग ऋषि ने तुम्हारे सामर्थ्य से अश्व की ग्रीवा धारण करके
मधुर वचन बोले थे. यह तुम्हारे उग्र कर्म को उसी प्रकार प्रकट करता है, जिस प्रकार बादल
ebook converter DEMO Watermarks*