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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 337, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 337

तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (७)
देवों के साथ-साथ देवी अदिति भी हमारी रक्षा करें एवं सबके रक्षक सविता जागरूक
होकर हमारा पालन करें. मित्र, वरुण, अदिति, सिंधु, पृथ्वी और आकाश हमारी प्रार्थना का
पालन करें. (७)
सूक्त—१०७ देवता—विश्वेदेव
यज्ञो देवानां प्रत्येति सुम्नमादित्यासो भवता मृळयन्तः.
आ वोऽर्वाची सुमतिर्ववृत्यादंहोश्चिद्या वरिवोवित्तरासत्.. (१)
हमारा यज्ञ देवों को सुख दे. हे आदित्यो! हमें सुखी करो. जो दरिद्र पुरुष को भी
धनलाभ कराने वाला है, तुम्हारा वही अनुग्रह हमें प्राप्त हो. (१)
उप नो देवा अवसा गमन्त्वङ्गिरसां सामभिः स्तूयमानाः.
इन्द्र इन्द्रियैर्मरुतो मरुद्गिरादित्यार्नो अदितिः शर्म यंसत्.. (२)
अंगिरागोत्रीय ऋषियों द्वारा गाए हुए मंत्रों से स्तुत देव रक्षा के निमित्त हमारे समीप
आवें. इंद्र धन के साथ, मरुद्गण प्राण आदि वायुओं के साथ तथा अदिति आदित्यों के साथ
हमें सुख दें. (२)
तन्न इन्द्रस्तद्वरुणस्तदग्निस्तदर्यमा तत्सविता चनो धात्.
तन्नो मित्रो वरुणो मामहन्तामदितिः सिन्धुः पृथिवी उत द्यौः.. (३)
हमारे द्वारा चाहा गया अन्न इंद्र, वरुण, अग्नि, अर्यमा और सविता हमें दें. मित्र, वरुण,
अदिति, सिंधु, पृथ्वी और आकाश हमारे उस अन्न की रक्षा करें. (३)
सूक्त—१०८ देवता—इंद्र और अग्नि
य इन्द्राग्नी चित्रतमो रथो वामभि विश्वानि भुवनानि चष्टे.
तेना यातं सरथं तस्थिवांसाथा सोमस्य पिबतं सुतस्य.. (१)
हे इंद्र और अग्नि! तुम्हारा जो अति विचित्र रथ समस्त संसार को प्रकाशित करता है,
उसी एक रथ के द्वारा हमारे यज्ञ में आओ और ऋत्विजों द्वारा निचोड़े हुए सोम को पिओ.
(१)
यावदिदं भुवनं विश्वमस्त्युरुव्यचा वरिमता गभीरम्.
तावाँ अयं पातवे सोमो अस्त्वरमिन्द्राग्नी मनसे युवभ्याम्.. (२)
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