ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 336, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंजैसे सारथि रथ को ऊंचे-नीचे मार्ग से बचाकर ले जाता है. (१)
त आदित्या आ गता सर्वतातये भूत देवा वृत्रतूर्येषु शम्भुवः.
रथं न दुर्गाद्वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अंहसो निष्पिपर्तन.. (२)
हे आदित्यो! तुम युद्धों में हमारी सहायता करने के लिए आओ एवं युद्धों में हमारे
सुखदाता बनो. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी
प्रकार पालन करें, जैसे सारथि रथ को ऊंचे-नीचे मार्ग से बचाकर ले जाता है. (२)
अवन्तु नः पितरः सुप्रवाचना उत देवी देवपुत्रे ऋतावृधा.
रथं न दुर्गाद्वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अंहसो निष्पिपर्तन.. (३)
सुखसाध्य स्तुति वाले पितर एवं देवों के पिता-माता के समान यज्ञवर्धक द्यावापृथ्वी
हमारी रक्षा करें. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी
प्रकार पालन करें, जैसे सारथि रथ को ऊंचेनीचे मार्ग से बचाकर ले जाता है. (३)
नराशंसं वाजिनं वाजयन्निह क्षयद्वीरं पूषणं सुम्नैरीमहे.
रथं न दुर्गाद्वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अंहसो निष्पिपर्तन.. (४)
हम मनुष्यों द्वारा प्रशंसनीय एवं अन्न के स्वामी अग्नि को प्रज्वलित करके तथा परम
बली पूषा के समीप जाकर सुखकर स्तोत्रों द्वारा याचना करते हैं. निवासस्थान देने वाले एवं
शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी प्रकार पालन करें, जैसे सारथि रथ को
ऊंचेनीचे स्थान से बचाकर ले जाता है. (४)
बृहस्पते सदमिन्नः सुगं कृधि शं योर्यत्ते मनुर्हितं तदीमहे.
रथं न दुर्गाद्वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अंहसो निष्पिपर्तन.. (५)
हे बृहस्पति! हमें सदा सुख दो. तुममें रोगों के शमन एवं भयों को दूर करने की जो
मानवानुकूल शक्ति है, हम उसे भी मांगते हैं. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव
पापों से बचाकर हमारा उसी प्रकार पालन करें, जिस तरह सारथि रथ को ऊंचेनीचे स्थान से
बचाकर ले जाता है. (५)
इन्द्रं कुत्सो वृत्रहणं शचीपतिं काटे निबाळ्ह ऋषिरह्वदूतये.
रथं न दुर्गाद्वसवः सुदानवो विश्वस्मान्नो अंहसो निष्पिपर्तन.. (६)
कुएं में गिरे हुए कुत्स ऋषि ने अपनी रक्षा के लिए वृत्रहंता एवं शचीपति इंद्र को
बुलाया. निवासस्थान देने वाले एवं शोभनदानयुक्त देव पापों से बचाकर हमारा उसी प्रकार
पालन करें, जैसे सारथि रथ को ऊंचे-नीचे स्थान से बचाकर ले जाता है. (६)
देवेर्नो देव्यदितिर्नि पातु देवस्त्राता त्रायतामप्रयुच्छन्.
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