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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1338, कुल 1855 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1338

अन्न एवं रस को दुहते हैं. (१६)
सोमस्य मित्रावरुणोदिता सूर आ ददे. तदातुरस्य भेषजम्.. (१७)
हे मित्र व वरुण! निकल आने पर सूर्य सोमरस ग्रहण करते हैं. वह ग्रहण हम बीमारों
की दवा है. (१७)
उतो न्वस्य यत्पदं हर्यतस्य निधान्यम्. परि द्यां जिह्वयातनत्.. (१८)
सोमरस देने वाले मुझ हर्यत ऋषि का स्थान हव्य रखने योग्य है. वहां बैठकर अग्नि
अपनी ज्वाला से द्युलोक को भरते हैं. (१८)
सूक्त—६२ देवता—अश्विनीकुमार
उदीराथामृतायते युञ्जाथामश्विना रथम्. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (१)
हे अश्विनीकुमारो! यज्ञ की अभिलाषा करने वाले मेरे लिए उन्नत बनो एवं यज्ञ में आने
के लिए रथ में घोड़े जोड़ो. तुम्हारी रक्षा हमारे समीप रहे. (१)
निमिषश्चिज्जवीयसा रथेना यातमश्विना. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (२)
हे अश्विनीकुमारो! आंखों के निमेष से भी अधिक गतिशील रथ द्वारा हमारे यज्ञ में
आओ. तुम्हारी रक्षा हमारे समीप रहे. (२)
उप स्तृणीतमत्रये हिमेन घर्ममश्विना. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (३)
हे अश्विनीकुमारो! असुरों द्वारा अग्नि में फेंके हुए अत्रि ऋषि की जलन दूर करने के
लिए जल छिड़को. तुम्हारी रक्षा हमारे समीप रहे. (३)
कुह स्थ: कुह जग्मथु: कुह श्येनेव पेतथु:. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (४)
हे अश्विनीकुमारो! तुम कहां हो, कहां जाते हो और बाज के समान कहां गिरते हो?
तुम्हारी रक्षा हमारे समीप रहे. (४)
यदद्य कर्हि कर्हि चिच्छ्रुश्रूयातमिमं हवम्. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (५)
हे अश्विनीकुमारो! हमें यह पता नहीं है कि आज तुम कहां और कब हमारी पुकार
सुनोगे? तुम्हारी रक्षा हमारे पास रहे. (५)
अश्विना यामहूतमा नेदिष्ठं याम्याप्यम्. अन्ति षद्भूतू वामव:.. (६)
मैं उचित समय पर बुलाने योग्य अश्विनीकुमारों एवं उनके समीपवर्ती बंधुओं के पास
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