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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1337, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1337

आ दशभिर्विवस्वत इन्द्रः कोशमचुच्यवीत्. खेदया त्रिवृता दिवः.. (८)
यजमान ने दस उंगलियों द्वारा इंद्र से याचना की. इंद्र ने आकाश में तीन प्रकार की
किरणों द्वारा मेघ से जल टपकाया. (८)
परि त्रिधातुरध्वरं जूर्णिरिति नवीयसी. मध्वा होतारो अञ्जते.. (९)
तीन रंगों वाले एवं वेगवान् अग्नि अपनी नवीन ज्वाला के साथ यज्ञ में जाते हैं. अध्वर्यु
आदि घी एवं मधु से उसकी पूजा करते हैं. (९)
सिञ्चन्ति नमसावतमूच्चाचक्रं परिज्मानम्. नीचीनबारमक्षितम्.. (१०)
अध्वर्यु नमस्कार के द्वारा अवनत, ऊपर स्थित चक्र वाले, सब ओर व्याप्त, नीचे की
ओर द्वार वाले एवं अक्षीण अग्नि को सींचते हैं. (१०)
अभ्यारमिदद्रयो निषिक्तं पुष्करे मधु. अवतस्य विसर्जने.. (११)
आदर करते हुए अध्वर्युगण समीपवर्ती एवं रक्षक अग्नि के विसर्जन के समय
विशालपात्र में मधु सिक्त करते हैं. (११)
गाव उपावतावतं मही यज्ञस्य रप्सुदा. उभा कर्णा हिरण्यया.. (१२)
हे गायो! यज्ञ के लिए दोहन के समय तुम रक्षक अग्नि के पास जाओ. अग्नि के दोनों
कान सोने के हैं. (१२)
आ सुते सिञ्चत श्रियं रोदस्योरभिश्रियम्. रसा दधीत वृषभम्.. (१३)
हे अध्वर्युगण! दूध दुह लेने के बाद द्यावा-पृथिवी पर आश्रित दूध को सींचो. इसके बाद
बकरी के दूध में अग्नि को स्थापित करो. (१३)
ते जानत स्वमोक्यं१ सं वत्सासो न मातृभिः. मिथो नसन्त जामिभिः.. (१४)
गायों ने अपने निवासदाता अग्नि को जाना. बछड़े जिस प्रकार अपनी माताओं से
मिलते हैं, उसी प्रकार गाएं अपने साथ की दूसरी गायों को लेकर अग्नि से मिलती हैं. (१४)
उप स्रक्वेषु बप्सतः कृण्वते धरुणं दिवि. इन्द्रे अग्ना नमः स्वः.. (१५)
ज्वाला के द्वारा भक्षण करने वाले अग्नि का अन्न अंतरिक्ष में इंद्र और अग्नि का पोषण
करता है. इंद्र एवं अग्नि को हव्य अन्न दो. (१५)
अधुक्षत्पिप्युषीमिषमूर्जं सप्तपदीमरिः. सूर्यस्य सप्त रश्मिभिः.. (१६)
अध्वर्यु वायु एवं गतिशील माध्यमिकी वाक् के द्वारा सूर्य की सात किरणों से बढ़े हुए
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