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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1141, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1141

क्व१ त्यानि नौ सख्या बभूवुः सचावहे यदवृकं पुरा चित्.
बृहन्तं मानं वरुण स्वधावः सहस्रद्वारं जगमा गृहं ते.. (५)
हे वरुण! हमारी पुरातन मित्रता कहां हुई थी? हम उसी पुरानी एवं विनाशरहित मित्रता
को निभा रहे हैं. हे अन्नस्वामी वरुण! मैं तुम्हारे अति विस्तृत एवं द्वारों वाले घर में जाऊं. (५)
य आपिर्नित्यो वरुण प्रियः सन्त्वामागांसि कृणवत्सखा ते.
मा त एनस्वन्तो यक्षिन् भुजेम यन्धि ष्मा विप्रः स्तुवते वरूथम्.. (६)
हे वरुण! जो वसिष्ठ तुम्हारा सगा पुत्र है, जिसने पूर्वकाल में तुम्हारा प्रिय बनकर
अपराध किए हैं, वह इस समय तुम्हारा मित्र हो. हे यज्ञस्वामी वरुण! हम पापयुक्त होकर
भोगों को न भोगें. हे मेधावी वरुण! तुम स्तोता को घर दो. (६)
ध्रुवासु त्वासु क्षितिषु क्षियन्तो व्य१स्मत् पाशं वरुणो मुमोचत्.
अवो वन्वाना अदितेरुपस्थाद्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः... (७)
हम ध्रुवभूमि पर निवास करते हुए स्तुति बोलते हैं. वरुण हमारे फंदों को छुड़ाएं. हम
टुकड़े न होने वाली धरती के पास से वरुण के रक्षासाधनों का भोग करें. हे देवो! तुम
कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (७)
सूक्त—८९ देवता—वरुण
मो षु वरुण मृन्मयं गृहं राजन्नहं गमम्. मृळा सुक्षत्र मृळय.. (१)
हे स्वामी वरुण! मैं तुम्हारे द्वारा दिया हुआ मिट्टी का घर प्राप्त न करूं. हे शोभनधन
वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (१)
यदेमि प्रस्फुरन्निव दृतिर्न ध्मातो अद्रिवः. मृळा सुक्षत्र मृळय.. (२)
हे आयुधों वाले वरुण! तुम्हारे द्वारा बंधा हुआ मैं ठंड से कांपता हुआ एवं वायुप्रेरित
बादल के समान आता हूं. हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया
करो. (२)
क्रत्वः समह दीनता प्रतीपं जगमा शुचे. मृळा सुक्षत्र मृळय.. (३)
हे धनस्वामी एवं निर्मल वरुण! मैं असमर्थता के कारण कर्त्तव्य कर्मों का विरोधी बना
हूं. हे शोभनधन वाले वरुण! मुझे सुखी बनाओ एवं मुझ पर दया करो. (३)
अपां मध्ये तस्थिवांसं तृष्णाविदज्जरितारम्. मृळा सुक्षत्र मृळय.. (४)
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