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सर्वकोश
ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Rigveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,855 पृष्ठ

पृष्ठ 1055, कुल 1855 में से

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पृष्ठ 1055

मिलकर भी तुम्हारी महिमा से नहीं बढ़ सकते. तुमने अपनी शक्ति से वृत्र को मारा था. युद्ध
के द्वारा शत्रु तुम्हारा अंत नहीं पाते. (६)
देवाश्चित्ते असुर्याय पूर्वेऽनु क्षत्राय ममिरे सहांसि.
इन्द्रो मघानि दयते विषह्येन्द्रं वाजस्य जोहुवन्त सातौ.. (७)
हे इंद्र! प्राचीन देवों और राक्षसों ने शक्तिप्रयोग एवं हिंसा करने में स्वयं को तुमसे हीन
माना था. इंद्र शत्रुओं को हराकर उनका धन अपने भक्तों को देते हैं. स्तोता अन्न पाने के लिए
इंद्र की स्तुति करते हैं. (७)
कीरिश्चिद्धि त्वामवसे जुहावेशानमिन्द्र सौभगस्य भूरे:.
अवो बभूथ शतमूते अस्मे अभिक्षत्तूस्तवावतो वरूता.. (८)
हे स्वामी इंद्र! स्तोता तुम्हें अपनी रक्षा के लिए बुलाता है. हे बहुतों की रक्षा करने वाले
इंद्र! तुम हमारे विपुल धन के रक्षक बने थे. तुम्हारे समान शक्तिशाली यदि कोई हमारा हिंसक
हो तो उसे रोको. (८)
सखायस्त इन्द्र विश्वह स्याम नमोवृधासो महिना तरुत्र.
वन्वन्तु स्मा तेऽवसा समीकेऽभीतिमर्यो वणुषां शवांसि.. (९)
हे इंद्र! हम स्तुति द्वारा तुम्हें बढ़ाते हुए सदा तुम्हारे मित्र रहें. हे महत्त्व द्वारा सबकी रक्षा
करने वाले इंद्र! तुम्हारी रक्षा के सहारे श्रेष्ठ होता युद्ध में अभय होकर हिंसकों की शक्ति नष्ट
करें. (९)
स न इन्द्र त्वयताया इषे धास्तमना च ये मघवानो जुनन्ति.
वस्वी षु ते जरित्रे अस्तु शक्तिर्यूयं पात स्वस्तिभिः सदा नः.. (१०)
हे इंद्र! अपने दिए हुए अन्न का उपभोग करने के लिए हमारी रक्षा करो. जो लोग अपने
आप तुम्हें हव्य देते हैं, उनकी भी रक्षा करो. तुम्हारे स्तोता मुझ में तुम्हारी प्रशंसनीय स्तुतियां
करने की शक्ति हो. तुम कल्याणसाधनों द्वारा हमारी सदा रक्षा करो. (१०)
सूक्त—२२ देवता—इंद्र
पिबा सोममिन्द्र मन्दतु त्वा यं ते सुषाव हर्यश्वाद्रिः.
सोतुर्बाहुभ्यां सुयतो नार्वा.. (१)
हे इंद्र! तुम सोमरस पिओ. सोम तुम्हें प्रसन्न करे. हे हरि नामक घोड़ों के स्वामी! जैसे
लगाम द्वारा घोड़ा वश में किया जाता है, उसी प्रकार सोमरस निचोड़ने वाले के दोनों हाथों
द्वारा पकड़े गए पत्थरों ने तुम्हारे लिए सोम तैयार किया है. (१)
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