ऋग्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Rigveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 1049, कुल 1855 में से
संदर्भ में पढ़ेंमर्ताँ एनः स्तुवतो यः कृणोति तिग्मं तस्मिन्नि जहि वज्रमिन्द्र.. (१८)
हे इंद्र! तुम्हारे बहुत से शत्रु तुम्हारे वश में हो गए हैं. उत्साही नास्तिक को वश में करो.
नास्तिक तुम्हारी स्तुति करने वालों का अहित करता है. इसके विरुद्ध शक्तिशाली वीर को
भेजो एवं उसे अपने वज्र से मारो. (१८)
आवदिन्द्रं यमुना तृत्सवश्च प्रात्र भेदं सर्वताता मुषायत्.
अजासश्च शिग्रवो यक्षवश्च बलिं शीर्षाणि जभ्रुरश्व्यानि.. (१९)
इस युद्ध में इंद्र ने नास्तिक भेद को मारा था एवं यमुना ने तृत्सुओं व इंद्र को प्रसन्न
किया था. अज, शिग्रु एवं यक्षु जनपद ने घोड़ों के सिर इंद्र को भेट में दिए थे. (१९)
न त इन्द्र सुमतयो न रायः सञ्चक्षे पूर्वा उषसो न नूत्नाः.
देवकं चिन्मान्यमानं जघन्थाव त्मना बृहतः शम्बरं भेत्.. (२०)
हे इंद्र! तुम्हारी नवीन तथा प्राचीन कृपाएं एवं संपत्तियां उषा के द्वारा वर्णन नहीं की जा
सकतीं. तुमने मान्यमान के पुत्र देवक का वध किया एवं बड़ा पहाड़ उठाकर शंबर का भेद
किया. (२०)
प्र ये गृहादममदुस्त्वाया पराशरः शतयातुर्वसिष्ठः.
न ते भोजस्य सख्यं मृषन्ताधा सूरिभ्यः सुदिना व्युच्छान्.. (२१)
हे इंद्र! अनेक राक्षसों को नष्ट करने वाले पराशर एवं वसिष्ठ ऋषि तुम्हारी कामना करके
अपने घर को गए एवं उन्होंने तुम्हारी स्तुति की. वे अपने पालनकर्त्ता की अर्थात् तुम्हारी
मित्रता नहीं भूले थे. उनके दिन सदा शोभन होते हैं. (२१)
द्वे नप्तुर्देववतः शते गोर्द्वा रथा वधूमन्ता सुदासः.
अर्हन्नग्ने पैजवनस्य दानं होतेव सद्म पर्येमि रेभन्.. (२२)
हे अग्नि! मैंने इंद्र की स्तुति करके राजा देववान के नाती एवं पिजवन के पुत्र सुदास से
रथ पाया था. मैं होता के समान यज्ञशाला में जाता हूं. (२२)
चत्वारो मा पैजवनस्य दानाः स्मद्दिष्टयः कृशनिनो निरेके.
ऋज्रासो मा पृथिविष्ठाः सुदासस्तोकं तोकाय श्रवसे वहन्ति.. (२३)
पिजवन के पुत्र राजा सुदास को श्रद्धा एवं दान के प्रतिरूप, सोने के अलंकारों से
सुशोभित, ऊंचे-नीचे स्थान में भी सीधे चलने वाले एवं पृथ्वी पर स्थित चार घोड़े पुत्र के
समान पालनीय वसिष्ठ को पुत्र के यश के लिए ढोते हैं. (२३)
यस्य श्रवो रोदसी अन्तरुर्वी शीर्णोशीर्णे विबभाजा विभक्ता.
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