सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
संग्रह पर लौटें

रतिमञ्जरी (कवि जयदेव - कामशास्त्र एवं शृंगार-रस लक्षण सटीक)

Ratimanjari of Kavi Jayadeva with Hindi Commentary

कवि जयदेव (सम्पादक: पण्डित रामदत्त शर्मा) द्वारा

DevanagariHindipublished18 पृष्ठ

१६ रतिमञ्जरी—
रमण करै । यह कामिनियों के मनको हरने वाला रतिनाग नाम आसन
कहा है ॥ ५६ ॥
अथ विद्याधरासनलक्षणम्—
नार्याश्चोरुयुगं धृत्वा कराभ्यां ताडयेत्पुनः ।
रमयेन्निर्भरं कामी बन्धो विद्याधरो मतः ॥५७॥
टी०—कामी पुरुष दोनों हाथों से स्त्री के दोनों जङ्घे को धारण कर
फिर योनि ताडन करता हुआ दृढ रमण करै, यह विद्याधर नाम आसन
कहा है ॥ ५७ ॥
अथ कामिजनप्रशंसा—
स्त्रियमानीय यत्नेन विधृत्य चरणद्वयम् ।
वशं नयति यः कामी रतिशास्त्रविचक्षणः ॥५८॥
टी०—जो कामी पुरुष यत्न से स्त्री को लाकर उसके दोनों चरणों
को धर कर वशीभूत करता है, वह रतिशास्त्र का पण्डित है ॥ ५८ ॥
रतिशास्त्रं समाकर्ण्य बन्धान् पद्मादिषोडश ।
नानाविधरतिं कुर्यात्कामिन्या कामुको जनः ॥५९॥
टी०—कामी पुरुष रतिशास्त्र को सुनकर पद्मादि सोलह आसन को
जानकर कामिनी के साथ अनेक प्रकार से रति करै ॥ ५९ ॥
सर्वशास्त्रार्थवक्त्रेण जयदेवेन धीमता ।
मञ्जरी रतिशास्त्रस्य कृत्वा नीता समाप्तताम् ॥६०॥
टी०—सब शास्त्रों का अर्थ मुख में है जिसके ऐसा बुद्धिमान् जय-
देव कवि ने रतिशास्त्र की मञ्जरी समाप्त की ॥ ६० ॥

ॐ विक्रेयसंस्कृतपुस्तकानि ॐ
अन्योक्तिसाहस्री—पं० श्रीबदरीनाथझा कृत ॥=)
अर्थसंग्रह—पं० श्रीराजनारायणशास्त्रीकृत सं० टी० भा० टी० १)
अलङ्कारसारमञ्जरी—म०म० पं० श्रीनारायणशास्त्रीखिस्तेकृत ।=)
उत्कीर्णलेखाञ्जलि—श्रीजयचन्द्रविद्यालङ्कारकृत सं.टी.भा०टी० ।।।)
मेघदूत—सं० टी०, श्रीमन्नालालअभिमन्युकृत भा० टी० १।)
छन्दःकौमुदी--म० म० पं० श्रीनारायणशास्त्री खिस्ते कृत ।=)
जातकमाला—प० श्री बटुकनाथशास्त्रीखिस्ते कृत सं० टी० २)
तर्कभाषा—पं० श्री राजनारायणशास्त्री कृत सं०टी०, भा०टी० १)
नैषधीयचरित--पं० श्रीऋषीश्वरनाथभट्ट कृत हि० टी० ६)
पञ्चतन्त्र—प्रथमतन्त्र, श्रीमन्नालालअभिमन्यु कृत हि० टी० २।।)
पालिजातकावलि--प्रो० श्रीबटुकनाथशर्माकृत सं.टी.,भा.टी. २।)
प्रसन्नराघव नाटक--पं० श्रीरामचन्द्रमिश्रकृत ,, ,, ३)
मुद्राराक्षस नाटक-पं०श्रीब्रह्मानन्दशुक्लकृत सं.टी.भा.टी. २) २ ॥)
मृच्छकटिक नाटक-,, ,, ,, ,, ५) ६)
रघुवंश महाकाव्य--१-२सर्ग, सञ्जीवनी, हिन्दी टीका सहित १)
रामवनगमन—पं० श्रीराजनारायणशास्त्रीकृत सं०टी०भा०टी० १।)
विदुलोपाख्यान—,, ,, ,, ,, ॥=)
वैदिकसूक्तसंग्रह—पं० श्रीवेणीरामशर्मागौडकृत ,, ,, १।)
सावित्र्युपाख्यान—पं० श्रीब्रह्मानन्दशुक्लकृत सं०टी० भा०टी० १।)
संस्कृतसाहित्य का सम्पूर्णेतिहास--श्रीहजूररामशास्त्रीकृत ॥)
हर्षचरितसारदीपिका--पं० श्रीब्रह्मानन्दशुक्लकृत हिन्दी ॥)
सर्वविधपुस्तकप्राप्तिस्थानम्—
मास्टर खेलाड़ीलाल ऐण्ड सन्स
संस्कृत बुकडिपो,
कचौड़ीगली, बनारस-१