रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ४१६
जिस स्त्री का पति वेश्या के पास जाय, उस स्त्री को सोचना
चाहिए कि मुझमें क्या कमी हुई जिसके कारण पति का मन दूसरी
पर गया । सत्कार में तो कोई त्रुटि नहीं हुई, कोई अनुचित वचन
तो नहीं कहा गया, शृङ्गार-भूषा में तो कमी न हुई इत्यादि बातों का
विचार कर अपने दोषों को खोजे । जब कोई दोष समझ में आ
जाय तो उसे दूर कर दे । यह निश्चित बात है जो स्त्री प्रति दिन
इन बातों पर ध्यान रखती है उसका पति कभी कुराह पर नहीं
जाता और चला गया होगा तो अवश्य लौट आवेगा ।
घर में प्रायः वृद्धा स्त्रियाँ पुत्र वधुओं को जब शृङ्गार से सजते
देखती हैं तो उन पर वाग्बाण छोड़ती हुई कहती हैं—इसे शृङ्गार
से ही फुरसत नहीं, आज ही रिझायेगी, मानो अप्सरा ही बनेगी
इत्यादि अनेक कुवाच्य कह डालेंगी । एक तो पहले ही संकोचवश
उन्होंने कुछ शृङ्गार किया । उस पर ताना-कशी हो गयी । फिर
क्या था उनका उत्साह सदा के लिए नष्ट हो गया । अगर शृङ्गार
किया भी तो किसी के घर विवाह आदि संस्कार अवसर पर दूसरों
को दिखाने के लिए । जो शृङ्गार केवल पति के लिए किया गया
उस पर तो आवाज कसी गयी और जो दूसरों के लिए शृंगार
किया गया उसमें सहयोग दिया जाय इसका परिणाम क्या होगा,
विचारशील पाठक स्वयं विचार सकते हैं । वे भी जब सास बनती
हैं तो वह अपनी पुत्र-वधुओं से वैसा ही बर्ताव करती हैं । इसी
लिए आज मनुष्य घर की सुन्दर नारियों को छोड़कर वेश्याओं के