रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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ही नहीं प्रत्युत रोग नाश भी है । “एकाक्रिया द्व्यर्थकरी प्रसिद्धा”
“आम के आम और गुठली के दाम” इसी को कहते हैं अर्थात्—
शुद्धता की शुद्धता और रोग का भी नाश !
—०—
तैल मर्दन
तैल खाने की अपेक्षा शरोर पर मर्दन करने में घी खाने से भी
कई गुणा अधिक शक्ति प्रदान करता है शरीर पर कान्ति, खाल
पर चमक और मजबूती के साथ मुलाइमियत लाता है । स्फूर्ति,
हलकापन और नैरोग्यता प्रदान करता है । देह में खसरा, खुजली
आदि रोगों को उत्पन्न नहीं होने देता । अंगों को मोटा और सुडौल
करता है । बुढ़ापे तक अंगों को जकड़ने नहीं देता । चाहे कितना
भी परिश्रम किया हो उसकी थकावट क्षणों में दूर करता है ।
तैल की मालिश करने, के लिए दो आदमियों की आवश्यकता
है, एक तेल मलने वाला और दूसरा मालिश कराने वाला । किसी
अच्छे स्वच्छ खुले स्थान में बैठकर जहाँ तेज हवा न आती हो
मालिश करें । मालिश में कड़ुआ तेल काम में लाना चाहिए । शुद्ध
कड़ुआ सरसों का तेल छटाँक डेढ़ छटाँक लेकर साफ कपड़े से
छान ले । तत्पश्चात् मालिश करने वाला दोनों हाथों में लगाकर
जिसके मालिश करनी हो उसके सिर में और तालू पर लगाकर
हाथ की दोनों हथेली से घर्षण करे । इसी प्रकार जल्दी-जल्दी