रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३५५
बेलगिरी, धाय के फूल, नेत्रवाला, लोध और गजपीपल के
क्वाथ में शहद डालकर पिलाने से भी अतिसार नष्ट हो जाता है ।
नागरमोथा, अतीस, इन्द्रजव, नेत्रवाला का क्वाथ बालक के
अतिसार को अच्छा कर देता है ।
आम की जड़ का स्वरस भी बच्चों के अतिसार को अच्छा
करने में एक ही चीज है ।
सोंठ, अतीस, नागरमोथा, कूड़े की छाल इनका काढ़ा पिलाने
से भी अतिसार से बालक का पिण्ड छूट जाता है और दस्त
नियमित रूप से आने लगते हैं ।
यदि अतिसार के साथ ज्वर भी हो तो नागरमोथा, पीपल,
अतीस, काकड़ासिंगी इनका चूर्ण शहद के साथ चटाना चाहिए ।
इस दवा से अतिसार और ज्वर का तो नाश हो ही जाता है-साथ
ही खांसी और दूध गिरना भी आन-फानन बन्द हो जाता है ।
अथवा हल्दी, दारुहल्दी, मुलहठी, कंटकारी की जड़ और इन्द्रजव
का काढ़ा पिलाने से भी ज्वरातिसार नष्ट हो जाता है । या धाय के
फूल, बेल, धनियाँ, लोध, इन्द्रजव का चूर्ण शहद में चटावे ।
यदि इनके साथ प्यास भी लगती हो तो मोथा, सोंठ, अतीस
इन्द्रजव और खस का काढ़ा पिलाना चाहिए । और यदि केवल
प्यास हो, अतिसार या ज्वर न हो-तो पीपल, मुलहठी, जामुन के
पत्ते और आम के पत्ते का चूर्ण शहद के साथ चटाने से बालक की
प्यास मिट जाती है । अथवा अनारदाना, सफेद जीरा और नाग-