सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 364, कुल 440 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 364

३५४ असली कोकशास्त्र
हिचकी
सोना गेरू को पीसकर शहद के साथ चटाने से बालक की
हिचकी बन्द हो जाती है। या सोंठ, आँवला, पीपल, इनका चूर्ण
शहद में मिलाकर चटाना भी हिचकी के लिये बहुत ही लाभदायक
है। अथवा पीपल और रेणुका बीज के क्वाथ में भुनी हुई हींग
और शहद डालकर पिलाना चाहिए। इससे सब तरह की हिचकी
जाती रहती है, ऐसा धन्वन्तरि जी ने लिखा है।
—:१०:—
अतिसार
इसको ठेठ भाषा में 'पेट चलना' कहा जाता है। यह रोग
सर्दी-गर्मी लगने से, तथा दांत निकलते समय होता है। यदि दाँत
निकलते समय दस्त आते हों तो किसी प्रकार की भी दवा नहीं
करनी चाहिए। क्योंकि उस समय दवा से दस्त को रोकना बच्चे
के लिए बड़ा ही हानिकारक होता है। हाँ, यदि ओर कारणों से
दस्त अधिक आते हों तो फौरन इलाज करना चाहिए। इस रोग
की कुछ ओषधियां वैद्यक ग्रन्थों से नीचे उद्धृत की जाती हैं:—
लोध्र, मँजीठ, नेत्रवाला, और धाय के फूल सम मात्रा में
लेकर इनका क्वाथ बालक को पिलाना अतिसार के लिए अत्यन्त
लाभदायक है। इससे अतिसार शीघ्र नष्ट हो जाता है।