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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 343, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र ३३५
गर्भिणी की वायु
पाँच या सात बादाम के बीज और एक माशे गेहूँ की चोकर
प्रतिदिन खाने से वायु का कोप गर्भिणी स्त्री को कभी नहीं होता ।
यदि मूत्र न उतरता हो तो दाब की जड़, दूब की जड़ और
काँस की जड़ इनको थोड़ा सा लेकर दूध में औटावे और फिर
उसे पी जाय । इससे गर्भिणी को बिना किसी प्रकार के कष्ट के
पेशाब उतर जाता है ।
—०—
संग्रहणी
यदि भोजन न पचे, खाते ही दस्त हो जाय तो चावल का
सत्तू आम और जामुन के छिलके के काढ़े से खाना चाहिए । इससे
बहुत शीघ्र जठराग्नि ठीक होकर अपना काम करने लगती है ।
—:०:—
गर्भिणी को वमन
जब गर्भाधान हो जाता है, तब बहुधा स्त्रियाँ वमन करने
लगती हैं । इसमें गेरू को आग में गरम करके थोड़े से पानी में
बुझाकर वही पानी पीना चाहिए । या कपूरकचरी को पीसकर मूँग
के बराबर गोली बनाकर सेवन करे अथवा वट-वृक्ष की डाँढ़ी
जलाकर उसकी राख शहद में मिलाकर चाटे ।