रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र ३३५
गर्भिणी की वायु
पाँच या सात बादाम के बीज और एक माशे गेहूँ की चोकर
प्रतिदिन खाने से वायु का कोप गर्भिणी स्त्री को कभी नहीं होता ।
यदि मूत्र न उतरता हो तो दाब की जड़, दूब की जड़ और
काँस की जड़ इनको थोड़ा सा लेकर दूध में औटावे और फिर
उसे पी जाय । इससे गर्भिणी को बिना किसी प्रकार के कष्ट के
पेशाब उतर जाता है ।
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संग्रहणी
यदि भोजन न पचे, खाते ही दस्त हो जाय तो चावल का
सत्तू आम और जामुन के छिलके के काढ़े से खाना चाहिए । इससे
बहुत शीघ्र जठराग्नि ठीक होकर अपना काम करने लगती है ।
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गर्भिणी को वमन
जब गर्भाधान हो जाता है, तब बहुधा स्त्रियाँ वमन करने
लगती हैं । इसमें गेरू को आग में गरम करके थोड़े से पानी में
बुझाकर वही पानी पीना चाहिए । या कपूरकचरी को पीसकर मूँग
के बराबर गोली बनाकर सेवन करे अथवा वट-वृक्ष की डाँढ़ी
जलाकर उसकी राख शहद में मिलाकर चाटे ।