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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र २४६
कभी मनुष्य निष्प्राण हो जाता है। विचारों का प्रभाव मनुष्य पर
बड़ा ही गहरा पड़ता है। इस लिए पास में रहनेवाली स्त्रियों को
खूब बुद्धिमानी से गर्भिणी को उत्साहित रखना उचित है। इस
समय बहुत सी दाइयाँ भीतर हाथ डालकर देखती हैं; किन्तु यह
बहुत ही बुरा काम है। इससे प्रसूता को बहुत कष्ट होता है। गर्भा-
शय के भीतर बालक एक झिल्ली से मढ़ा रहता है। बच्चे के बाहर
निकलते-निकलते यह झिल्ली फट जाती है। झिल्ली के फटने का शब्द
भी होता है। इसके फटते ही गर्भोदक बहने लगता है, इससे बच्चे
के निकलने के मार्ग में चिकनाहट पैदा हो जाती है। कभी-कभी यह
झिल्ली नहीं भी फटती और बच्चा झिल्ली सहित बाहर निकल आता
है। इस समय होशियारी की जरूरत है। चतुर दाई को उचित है
कि खूब सावधानी से उस झिल्ली को चाकू से फाड़कर बालक को
निकाल ले। इस काम में यदि देर की जाती है तो बच्चा मर जाता
है। क्योंकि गर्भ में बच्चे के फेफड़े साँस लेने अथवा छोड़ने का
काम नहीं करते; किन्तु ज्योंही वह बाहर निकलता है, त्योंही उसकी
श्वास-प्रच्छ्वास क्रिया जारी हो जाती है। झिल्ली, उसके इस काम
में रुकावट डालती है, इस लिए उसके हटाने में विलम्ब होने से
बच्चा मर जाता है। इस काम में सावधानी रखने के लिए इस
वास्ते कहा गया है कि कहीं झिल्ली फाड़ने के समय चाकू बच्चे के
शरीर में न लग जाय।
कभी-कभी बच्चे पेट में ही मर जाते हैं। पेट में बच्चे के मर