रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२४८ असली कोकशास्त्र
समझ ले कि बालक आड़े पड़ा हुआ है और हाथ के बल उत्पन्न
होगा। इसमें स्त्री को बहुत कष्ट होता है। यहाँ तक कि सौ में
पंचानवे स्त्रियाँ मर जाती हैं।
बहुधा दाइयाँ वेदना के समय गर्भिणी से काँखने के लिये कहती
हैं। इसमें उनका उद्देश्य यह होता है कि इस प्रकार जोर लगाने
से बच्चा जल्द बाहर निकल आवेगा; किन्तु ऐसा करना अत्यन्त
घातक है। इस समय यदि गर्भिणी को रुचे तो थोड़ा घी डाला
हुआ दूध पिलाना चाहिए। हाँ यदि प्रसव हो रहा हो, तब तो
थोड़ा जोर लगाना ठीक होता है; पर उस समय तो अधिकांश
स्त्रियों को चेत ही नहीं रहता। प्रसव के समय इतनी वेदना होने
का कारण यह है कि गर्भाशय का मांस धीरे-धीरे सिकुड़ने लगता
है और प्रसव द्वार चौड़ा होने लगता है। गर्भाशय के सिकुड़ने की
लहरें उठती हैं, इन्हीं लहरों के कारण स्त्री को इतना कष्ट होता है।
गर्भाशय के भीतर बच्चा और कुछ तरल पदार्थ होते हैं।
इस समय बहुत सी स्त्रियाँ अपना दिल एकदम छोटा कर लेती
हैं। वे यह समझती हैं कि अब जान नहीं बचेगी। इसी से प्रसव
काल में पास में रहनेवाली स्त्रियों का बुद्धिमती होना आवश्यक
बतलाया गया है। क्योंकि चतुर स्त्रियाँ गर्भिणी को सान्त्वना दे
सकती हैं और अपनी बुद्धि-चातुरी से उसके दिलको बहला सकती
हैं। इस समय गर्भिणी में हिम्मत पैदा करना उसकी जीवन-रक्षा
के लिए बहुत ही आवश्यक होता है। छोटा दिल कर लेने से कभी-