रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)
Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary
पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंअसली कोकशास्त्र २४७
जल से धो कर सुखा लिया जाय और बाद सूतिका-गृह में बिछावे
तो अच्छा हो। जिस प्रकार उत्तम चारपाई की जरूरत है, उसी
प्रकार सूतिका-गृह में उत्तम, स्वच्छ, कोमल और सुखद बिछौने
की भी जरूरत है। सूतिका गृह में एक भी फालतू चीज न रहने
दे। प्रसुता की चारपाई दीवार के पास खिड़की के सामने बिछाना
चाहिए। उस घर में हर वक्त गरम पानी तैयार रहना चाहिए।
दाई को प्रसव के वक्त इस पानी से हाथ धोकर प्रसुता की सुश्रूषा
करनी चाहिए। जो दाई काम करने के लिए नियत की जाय,
उसे साफ वस्त्र पहना देना चाहिए और उसकी अँगुलियों के नाखून
भी कटवा दे। क्योंकि नाखून से गर्भस्थान में चोट लग जाने का
भय रहता है।
जब प्रसवकाल बिलकुल निकट आ जाय, तब खूब सावधानी
से यह देखना चाहिए कि बच्चा पेट में किस प्रकार से है। सिर
नीचे है या पैर अथवा आड़ा तो नहीं है। पहचानने की रीति यह
है कि प्रायः सभी बालकों का सिर नीचे की ओर होता है और
सिर के बल ही वे पैदा होते हैं। जब बालक का सिर नीचे की ओर
होता है, तब वह बायीं ओर से दाहिनी ओर को घूमता है और
स्त्री को बायीं ओर भारी मालूम होता है; किन्तु जिस स्त्री के दाहिनी
ओर भारी रहे और बालक दाहिनी ओर से बायीं ओर घूमे तब
समझना चाहिए कि बालक के पैर नीचे की ओर है और वह पैर
के बल उत्पन्न होगा। यदि दोनों ओर भारी रहे और घूमे न, तो