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सर्वकोश
रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

रतिरहस्य: असली कोकशास्त्र (पण्डित कोक्कोक - कामकला, दाम्पत्य-जीवन एवं सम्पूर्ण रति-विज्ञान)

Rati Rahasya or Asli Koka Shastra of Kokkoka with Hindi Commentary

पण्डित कोक्कोक (भाषा टीकाकार: पण्डित कन्हैयालाल) द्वारा

DevanagariHindipublished440 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 440 में से

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असली कोकशास्त्र १६
की सजा न मिलेगी ? इस लिये धर्मपूर्वक ही धनोपार्जन करना
चाहिये ।
धर्मपूर्वक जो अर्थ सञ्चित किया जाता है, उसी से सब काम
नायें पूरी करनी चाहियें । जो इस क्रम से वर्त्तता है, वही पुरुष
मोक्ष को प्राप्त होता है ।
काम के अर्थ इच्छा और रति लिये जाते हैं । धर्म की खोज
के लिये अनेक शास्त्र लिखे गये । अर्थोपार्जन करने के लिये भी
अनेक उपाय बतलाये गये । मोक्ष प्राप्ति के लिये भी अनेक साधन
शास्त्रों में वर्णन किये गये । इनमें किसी को भी किसी प्रकार का
विवाद एवं शंका करने की गुञ्जाइश नहीं मिली ।
किन्तु काम के सम्बन्ध में जब कभी विचार किया जाय तो
इसे बड़ी उपेक्षा की दृष्टि से यह कहकर टाल देते हैं कि इसमें
रक्खा ही क्या है ? यह तो सहज-प्रकृति है । यह बिना समझाये-
बुझाये ही सबको आ जाता है । किन्तु देखा जाय तो उनका यह
बड़ा ही अनर्गल विचार दिखायी देता है । क्योंकि जब किसी छोटे
से छोटे काम को भी करने के लिये मनुष्य तैयार होता है तो उसके
लिये उसे सैकड़ों सामान इकट्ठे करने पड़ते हैं । जैसे भोजन को
ही ले लीजिये । क्या मनुष्य गेहूँ उबाल कर खाने से पेट नहीं भर
सकता ? वह उसकी रोटी क्यों बनाता है । जब केवल नमक से
ही दाल का काम चल सकता है तब छौंकने की क्या जरूरत ?
गेहूँ, चना, घी, चीनी, दूध आदि पदार्थों से मनुष्य को सभी स्वाद